सुशीला तिवारी अस्पताल में उपनल कर्मचारियों की हड़ताल शुरू, तीन महीने से नहीं मिला वेतन

हल्द्वानी: उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार सुशीला तिवारी अस्पताल में वेतन नहीं मिलने से नाराज उपनल कर्मचारियों ने आज सोमवार से सांकेतिक हड़ताल ही शुरू कर दी है। यह प्रदर्शन प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगा और एक सप्ताह तक जारी भी रहेगा। करीब 659 कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी चले जाएंगे।

3 महीने से नहीं मिला वेतन, परिवार चलाना मुश्किल

650 से अधिक उपनल कर्मचारी, जो अस्पताल के विभिन्न विभागों में सेवाएं भी दे रहे हैं, पिछले 3 माह से वेतन नहीं मिलने से बेहद परेशान भी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक, सब कुछ ही ठप हो चुका है।

सरकार के फैसले से संकट गहराया

मामले की जानकारी के अनुसार, साल 2010 से पहले सुशीला तिवारी ट्रस्ट द्वारा संचालित इस अस्पताल में बड़ी संख्या में नियुक्तियां भी की गई थीं। बाद में इन कर्मचारियों की तैनाती उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम) के माध्यम से ही की गई। अब राज्य सरकार ने वेतन देने के लिए बजट पर रोक भी लगा दी है और निर्देश दिए हैं कि केवल सृजित (sanctioned) पदों के आधार पर ही भुगतान भी किया जाएगा। इस फैसले से उन कर्मचारियों पर सीधा असर भी पड़ा है, जिनकी नियुक्ति सृजित पदों से बाहर भी हुई थी। कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण व आजीविका पर सीधा हमला भी बताया है।

अस्पताल की सेवाओं पर असर, मरीजों को हो रही परेशानी

सांकेतिक हड़ताल का असर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी साफ दिखने लगा है।

  • ओपीडी,
  • लैब,
  • और अन्य जरूरी सेवाओं में भीड़ और अव्यवस्था भी बढ़ गई है।

मरीजों व उनके परिजनों को कई घंटे तक इंतजार भी करना पड़ रहा है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित भी हो सकती हैं।

कर्मचारियों की मांग:

  1. लंबित वेतन का तत्काल भुगतान
  2. सभी कार्यरत उपनल कर्मियों को नियमित किया जाए
  3. बजट रोकने के फैसले को वापस भी लिया जाए

सरकार की चुप्पी पर सवाल

कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर निरंतर अनदेखी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले कर्मियों को ही भूखा मारने पर तुली है। अगर सरकार और प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह हड़ताल सिर्फ अस्पताल तक सीमित न रहकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप भी ले सकती है। मरीजों की बढ़ती परेशानी और कर्मचारियों की नाराजगी, दोनों मिलकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर संकट में भी डाल सकती हैं।