पत्नी की हत्या का मामला: हाईकोर्ट ने पति की उम्रकैद रद्द की, क्या है इसकी वजह?
पत्नी हत्या मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, उम्रकैद की सजा रद्द
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दोषी सुनील सिंह पंवार को दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द भी कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने मामले को उत्तरकाशी की सत्र अदालत को वापस भेजते हुए निर्देश भी दिए हैं कि आरोपी का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत दोबारा और विधिसम्मत तरीके से दर्ज भी किया जाए।
हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने आरोपी से पूछताछ के दौरान सभी आपत्तिजनक परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से उसके सामने ही नहीं रखा। केवल यह पूछना कि क्या उसने 15 गवाहों के बयान सुने हैं, कानूनन त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया भी है। अदालत ने कहा कि प्रत्येक साक्ष्य को अलग-अलग प्रश्न के रूप में आरोपी के समक्ष रखना अनिवार्य है, ताकि उसे अपनी सफाई का पूरा अवसर भी मिल सके।
मामला 30 नवंबर 2013 का है, जब उत्तरकाशी के भटवाड़ी में सुनीता देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत भी हुई थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या की, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि सुनीता ने फांसी लगाकर आत्महत्या ही की थी।
हाईकोर्ट ने अपील के निपटारे में हुई देरी पर भी चिंता जताई और इसे त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन भी बताया। अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि रिकॉर्ड प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर मामले का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। सजा रद्द होने के बाद आरोपी को जमानत के लिए आवेदन करने की छूट भी दी गई है, हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी भी नहीं की गई है।