उत्तराखंड विद्युत लोकपाल के दो बड़े फैसले: किरायेदार को मिलेगा बिजली कनेक्शन, सोलर प्लांट की जिम्मेदारी उपभोक्ता की

उत्तराखंड के विद्युत लोकपाल ने बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े 2 महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाते हुए किरायेदारों के बिजली कनेक्शन के अधिकार व रूफटॉप सोलर प्लांट के रखरखाव को लेकर स्थिति स्पष्ट भी कर दी है।

पहले मामले में हरिद्वार निवासी आशा अग्रवाल की अपील पर सुनवाई करते हुए विद्युत लोकपाल डी.पी. गैरोला ने यूपीसीएल को निर्देश दिया कि आवेदक से 3 गुना सुरक्षा राशि लेकर 15 दिनों के भीतर नया बिजली कनेक्शन जारी भी किया जाए। यूपीसीएल ने संपत्ति मालिक (ट्रस्ट) के साथ चल रहे विवाद व किरायानामा समाप्त होने का हवाला देकर आवेदन खारिज भी कर दिया था।

लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 43 व 44 के अनुसार किसी भी परिसर का वास्तविक कब्जाधारी बिजली कनेक्शन पाने का अधिकार भी रखता है। चूंकि अदालत ने किरायेदार की बेदखली पर रोक लगा रखी है, इसलिए उन्हें बिजली कनेक्शन देने से इनकार ही नहीं किया जा सकता।

दूसरे मामले में टिहरी गढ़वाल निवासी सुंदर मणि डबराल की अपील खारिज करते हुए लोकपाल ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता के परिसर में लगे रूफटॉप सोलर पावर प्लांट के रखरखाव व उसकी उत्पादन क्षमता के लिए यूपीसीएल जिम्मेदार नहीं है।

डबराल ने आरोप लगाया था कि सोलर प्लांट लगाने वाली फर्म की लापरवाही व खराब आफ्टर-सेल सर्विस के कारण इन्वर्टर खराब रहा, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ और उन्हें अधिक बिजली बिल भी भरना पड़ा। उन्होंने यूपीसीएल से बिल माफ करने या संबंधित फर्म से वसूली कराने की मांग भी की थी।

लोकपाल ने कहा कि यूपीसीएल के साथ हुए समझौते के अनुसार इंटरकनेक्शन पॉइंट से पहले सोलर प्लांट के संचालन, रखरखाव व खराबी दूर करने की पूरी जिम्मेदारी उपभोक्ता की होती है। ऐसे में यूपीसीएल को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया भी जा सकता। लोकपाल ने इसे उपभोक्ता व प्लांट स्थापित करने वाली कंपनी के बीच का मामला मानते हुए अपील खारिज कर दी और उपभोक्ता को बकाया बिजली बिल जमा करने के निर्देश भी दिए।