उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर बढ़ी हलचल, श्रम विभाग अलर्ट

उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर विवाद भी तेज होता दिखाई दे रहा है। खासकर देहरादून के सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया में हालिया हंगामे के बाद श्रम विभाग सतर्क भी हो गया है। विभाग का कहना है कि कुछ बाहरी तत्व श्रमिकों को भड़काकर औद्योगिक माहौल खराब करने की कोशिश भी कर रहे हैं।

श्रम विभाग ने हाल ही में नई न्यूनतम मजदूरी दरें लागू भी की हैं। विभाग के अनुसार उत्तराखंड में तय मजदूरी पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है, लेकिन कुछ संगठन श्रमिकों के बीच यह प्रचार कर रहे हैं कि न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये भी होना चाहिए था। इसी मुद्दे को लेकर सेलाकुई क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन देखने को भी मिला।

स्थिति को देखते हुए श्रम विभाग ने अधिकारियों को मौके पर भेजकर श्रमिकों से संवाद भी किया। अधिकारियों ने श्रमिकों को नई मजदूरी दरों व सरकार की योजनाओं की जानकारी दी और अफवाहों से बचने की अपील भी की।

श्रम आयुक्त प्रकाश चंद दुमका ने कहा कि पहली बार इंजीनियरिंग उद्योगों के श्रमिकों के लिए अलग न्यूनतम मजदूरी भी तय की गई है। नई दरों के तहत गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्र में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 13,018 रुपये से लेकर अति कुशल श्रमिकों के लिए 14,611 रुपये भी तय की गई है। वहीं इंजीनियरिंग उद्योगों में अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,100 रुपये व कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये मासिक वेतन निर्धारित भी किया गया है।

हालांकि श्रमिक संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई व जीवन यापन के खर्च को देखते हुए वर्तमान मजदूरी पर्याप्त ही नहीं है। दूसरी ओर सरकार व उद्योग प्रबंधन औद्योगिक शांति बनाए रखने पर जोर भी दे रहे हैं, ताकि निवेश व रोजगार प्रभावित न हों।

श्रम विभाग ने औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि श्रमिक अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखें और किसी भी भ्रामक जानकारी से सावधान भी रहें।