गैरसैंण के जंगलों में आग की खबरों पर वन विभाग का इनकार, कहा– ‘कोई बड़ी घटना नहीं’

देहरादून: भराड़ीसैंण व गैरसैंण क्षेत्र के आसपास जंगलों में आग लगने की खबरों के बीच वन विभाग का अलग ही रुख सामने भी आया है। मुख्य वन संरक्षक व वनाग्नि के राज्य नोडल अधिकारी आईएफएस सुशांत पटनायक ने किसी भी बड़ी आग की घटना से इनकार भी किया है। उनका कहना है कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसए) के अलर्ट के अनुसार क्षेत्र में फिलहाल ‘जीरो अलर्ट’ की स्थिति भी है।

दरअसल, विधानसभा बजट सत्र के दौरान गैरसैंण के पास आदिबद्री क्षेत्र के भटोली गांव के आसपास जंगलों में आग लगने की घटना को मीडिया में प्रमुखता से भी उठाया गया था। इस संबंध में जब मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक से सवाल किया गया कि सरकार का पूरा तंत्र इन दिनों गैरसैंण में मौजूद होने के बावजूद जंगलों में आग की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं, तो उन्होंने किसी बड़ी आग की जानकारी होने से इनकार ही कर दिया।

उन्होंने कहा कि एफएसए अलर्ट के मुताबिक न तो कल और न ही आज किसी बड़ी वनाग्नि की चेतावनी भी जारी हुई है। उनके अनुसार जहां भी छोटी-मोटी आग की घटनाएं सामने आती ही हैं, वहां वन विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू भी पा लेती हैं। उन्होंने बताया कि जंगल की आग में पहला 1 घंटा सबसे अहम होता है और इसी दौरान फॉरेस्ट क्रू स्टेशन की टीमें और स्थानीय ग्राम पंचायत के लोग मिलकर आग बुझाने का प्रयास भी करते हैं।

हालांकि जिस विशेष स्थान व घटना का जिक्र किया गया, उस पर उन्होंने किसी तरह की जानकारी होने से साफ ही इनकार किया।

वनाग्नि सीजन की तैयारियों को लेकर उन्होंने बताया कि इस बार बारिश व बर्फबारी कम होने के कारण फायर सीजन को थोड़ा संवेदनशील भी माना जा रहा है। इसके बावजूद विभाग ने सभी फॉरेस्ट क्रू स्टेशनों को अलर्ट पर भी रखा है और कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है।

उन्होंने जानकारी दी कि 15 फरवरी से अब तक प्रदेश में वनाग्नि की 32 घटनाएं भी दर्ज की गई हैं, जिनमें करीब 17.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित भी हुआ है।

हालांकि जमीनी स्तर पर जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आने के दावे भी किए जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब कई स्थानों पर आग के दृश्य दिखाई दे रहे हैं, तब भी जिम्मेदार अधिकारी केवल सैटेलाइट अलर्ट के आंकड़ों के आधार पर बड़ी घटना से इनकार क्यों ही कर रहे हैं। इससे वनाग्नि को लेकर प्रशासन की तैयारियों और दावों पर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं।