सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अब वित्त व कार्मिक विभाग की सहमति अनिवार्य

देहरादून: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर शासन ने नया आदेश भी जारी किया है। अब शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती करने से पहले वित्त व कार्मिक विभाग की सहमति लेना अनिवार्य भी होगा।

शासन द्वारा शिक्षा महानिदेशक को जारी आदेश में कहा गया है कि पिछले वर्षों में छात्र संख्या के आधार पर माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के कई पद सृजित भी किए गए थे। लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार ही घट रही है। ऐसे में कई स्थानों पर शिक्षकों के पद आवश्यकता से अधिक भी हो सकते हैं।

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी भर्ती से पहले शिक्षा विभाग को वित्त व कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजना होगा। प्रस्ताव में यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूलों में वर्तमान में कितने स्वीकृत पद हैं, छात्रों की संख्या कितनी है, प्रस्तावित भर्ती की आवश्यकता क्या है और उससे सरकार पर कितना वित्तीय भार भी पड़ेगा।

इस संबंध में शिक्षा महानिदेशालय के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश भी दिए हैं।

तीन हजार से अधिक स्कूल बंद होने की कगार पर

प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से भी घट रही है। कई स्कूलों में छात्र संख्या 10 या उससे भी कम रह गई है, जिसके कारण 3 हजार से अधिक स्कूल बंद होने की कगार पर भी पहुंच गए हैं।

वहीं, राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री डॉ. सोहन माजिला ने कहा कि शिक्षा विभाग में पहले ही 2600 शिक्षकों के पद समाप्त भी किए जा चुके हैं और अब अन्य पद खत्म करने की तैयारी भी चल रही है। उन्होंने इसे सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश भी बताया है।