केदारनाथ हेली सेवा टिकट बुकिंग में ‘सिस्टम का स्कैम’? चंद मिनटों में 7,000 टिकट, जांच में जुटा प्रशासन

देहरादून। बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था का आलम ऐसा रहा कि मात्र चंद मिनटों में 7,000 से अधिक हेली टिकट बुक हो गए, और बुकिंग विंडो ही बंद हो गई। लेकिन इस प्रक्रिया ने एक बार फिर टिकट बुकिंग में संभावित गड़बड़ी को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

यह स्पष्ट नहीं है कि ये टिकट वास्तव में व्यक्तिगत रूप से श्रद्धालुओं द्वारा बुक किए गए या फिर एजेंटों के नेटवर्क ने तकनीकी जाल फैलाकर इन्हें कब्जा लिया। सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं और बुकिंग में इस्तेमाल हुए आईपी एड्रेस की जानकारी आईआरसीटीसी से भी मांगी है।

चंद मिनटों में ‘स्लॉट फुल’, श्रद्धालु मायूस

मंगलवार सुबह 12 बजे जैसे ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर हेली सेवा के लिए टिकट बुकिंग विंडो खोली गई, 40 मिनट के भीतर मई माह के सभी स्लॉट फुल ही हो गए। हैरानी की बात यह है कि बुकिंग के लिए नाम, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र और ओटीपी वेरिफिकेशन जैसी कई प्रक्रियाएं होती भी हैं, इसके बावजूद हजारों लोग ओटीपी का इंतजार करते रह गए, और देखते ही देखते विंडो बंद ही हो गई।

आंकड़ों के मुताबिक, 23,000 से अधिक लोग टिकट के लिए प्रयासरत थे, जबकि सिर्फ 7,000 से अधिक टिकट ही बुक हो सके। इसने हजारों श्रद्धालुओं को निराश ही कर दिया।

‘टिकट सिंडिकेट’ की आशंका

यह पहला मौका नहीं है जब आईआरसीटीसी की टिकट प्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं। वर्ष 2022 में सामने आए रेलवे टिकट स्कैम की यादें आज भी ताजा हैं, जब विदेशी सॉफ्टवेयर और एजेंट नेटवर्क के जरिये दलालों ने कंफर्म टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग भी की थी। तब कई एजेंट गिरफ्तार हुए थे और हजारों फर्जी आईडी भी बंद की गई थीं।

अब सवाल उठ रहे हैं कि कहीं वैसा ही नेटवर्क केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग में तो सक्रिय नहीं हो गया है?

एकमात्र बुकिंग प्लेटफॉर्म है IRCTC

गौरतलब है कि पिछले साल से केदारनाथ हेली सेवा की टिकट बुकिंग की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंपी गई है। कोई वैकल्पिक वेबसाइट या ऑफलाइन माध्यम उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में किसी अन्य माध्यम से टिकट बुकिंग की कोई संभावना भी नहीं है।

क्या कहता है प्रशासन?

उत्तराखंड सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में मानते हुए जांच के आदेश भी दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आईआरसीटीसी की प्रणाली यदि पारदर्शी है, तो फिर इतने बड़े स्तर पर टिकट इतने कम समय में कैसे और किसके माध्यम से बुक हुए — इसका उत्तर भी जरूरी है।

बाबा केदार के दर्शनों की लालसा में भक्तों का उमड़ता जनसैलाब और बुकिंग विंडो का एकाएक बंद होना, कहीं न कहीं एक बड़े तकनीकी व प्रशासनिक सवाल को भी जन्म दे रहा है। यदि वाकई में एजेंटों द्वारा कोई सिंडिकेट ऑपरेट किया गया है, तो यह केवल श्रद्धालुओं के साथ विश्वासघात ही नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर एक संगठित खेल है।

अब देखना यह होगा कि क्या यह मामला किसी कार्रवाई की ओर बढ़ता है या एक और “टिकट स्कैम” बनकर सरकारी फाइलों में ही दफन हो जाएगा।