Speed limits on 12 road routes in Uttarakhand to be revised; survey of 1,128 km of roads to be conducted.
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग अब प्रदेश की प्रमुख सड़कों पर गति सीमा नए सिरे से तय करने की तैयारी भी कर रहा है। इसके लिए प्रदेश के 12 प्रमुख सड़क मार्गों को चिन्हित भी किया गया है, जिनकी कुल लंबाई करीब 1128 किलोमीटर भी है। इन सभी मार्गों का सर्वे कराया जाएगा व सड़क की भौगोलिक स्थिति, घुमाव, ढलान और चढ़ाई को देखते हुए अलग-अलग हिस्सों के लिए गति सीमा भी तय की जाएगी।
परिवहन विभाग जल्द ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू करने जा रहा है। सर्वे के बाद मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर संबंधित आरटीओ इन मार्गों पर नई गति सीमा से जुड़े सांकेतिक बोर्ड भी लगाएंगे।
दरअसल, भारत सरकार की ओर से अलग-अलग श्रेणी की सड़कों व वाहनों के लिए पहले से अधिकतम गति सीमा निर्धारित है। नगर सीमा में आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर हल्के मोटर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा, मध्यम व भारी मोटर वाहनों और मालवाहक वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा, तिपहिया वाहनों के लिए 50 किलोमीटर प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा भी निर्धारित है।
लेकिन उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से काफी अलग भी हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें घुमावदार होने के साथ-साथ कई जगहों पर तेज ढलान व चढ़ाई वाली हैं। ऐसे में परिवहन विभाग का मानना है कि सड़क की वास्तविक स्थिति और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार गति सीमा तय भी की जानी जरूरी है।
सर्वे के लिए चिन्हित 12 मार्गों में कर्णप्रयाग-बदरीनाथ मार्ग के 125 किलोमीटर, ऋषिकेश-चिन्यालीसौड़-उत्तरकाशी मार्ग के 190 किलोमीटर व विकासनगर-यमुना ब्रिज-बड़कोट मार्ग के 100 किलोमीटर हिस्से भी शामिल हैं।
इसके अलावा धरासू बैंड-ब्रह्मखाल-बड़कोट मार्ग के 56 किलोमीटर, रानीखेत-कर्णप्रयाग मार्ग के 125 किलोमीटर, देहरादून-मसूरी मार्ग के 35 किलोमीटर व देहरादून-सेलाकुई-विकासनगर मार्ग के 42 किलोमीटर हिस्से का सर्वे भी किया जाएगा।
वहीं, ऋषिकेश-हरिद्वार-रुड़की-नारसन मार्ग के 75 किलोमीटर, आईएसबीटी देहरादून से डाटकाली टनल तक 7 किलोमीटर, टनकपुर-जसपुर मार्ग के 250 किलोमीटर, कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग के 38 किलोमीटर व हल्द्वानी-रानीखेत मार्ग के 85 किलोमीटर हिस्से को भी सर्वे में शामिल किया गया है।
परिवहन विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा के मुताबिक, सड़क दुर्घटनाओं के पीछे वाहनों की अधिक गति एक महत्वपूर्ण कारण के तौर पर भी सामने आ रही है। सड़कों के सुधारीकरण व ऑटोमोबाइल सेक्टर में तकनीकी प्रगति के कारण वाहनों की गति बढ़ी है, लेकिन पहाड़ी सड़कों की परिस्थितियों को देखते हुए इस गति को नियंत्रित करने की जरूरत भी है।
उन्होंने कहा कि जब तक अलग-अलग सड़क मार्गों के लिए गति सीमा का नए सिरे से निर्धारण नहीं होता, तब तक यह तय करना मुश्किल है कि किस सड़क पर किस तरह के वाहन की कितनी गति सुरक्षित भी होनी चाहिए।
परिवहन विभाग इससे पहले देहरादून से कर्णप्रयाग तक करीब 207 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग का ट्रायल सर्वे भी करा चुका है। यह सर्वे फरीदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन यानी IRTE से कराया गया था। IRTE ने देहरादून-ऋषिकेश-कर्णप्रयाग मार्ग की गति सीमा भी तय की थी।
इसके बाद प्रदेश के दूसरे प्रमुख सड़क मार्गों पर भी इसी तरह गति सीमा निर्धारित करने की जरूरत महसूस भी हुई। इसी उद्देश्य से एक कमेटी गठित की गई व कमेटी की बैठक में इन 12 सड़क मार्गों का चयन किया गया।
अब परिवहन विभाग जल्द टेंडर जारी भी करेगा। टेंडर के जरिए चुनी जाने वाली कंपनी सभी चिन्हित मार्गों का सर्वे भी करेगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग हिस्सों की गति सीमा तय की जाएगी व फिर संबंधित आरटीओ द्वारा सड़कों पर नई गति सीमा के संकेतक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
