Major decisions by the Uttarakhand Cabinet Changes to the vigilance structure, abolition of 11 posts, and a new arrangement for 11 posts.
देहरादून। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 4 अक्टूबर को चंपावत के एनएचपीसी बनबसा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विजिलेंस अधिष्ठान समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी भी दी गई। बैठक में विजिलेंस के ढांचे के पुनर्गठन, सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति और वर्ष 1965 की अधिसूचना में संशोधन से जुड़े फैसले भी लिए गए।
मंत्रिमंडल ने सतर्कता अधिष्ठान यानी विजिलेंस के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी देते हुए कुल 11 पद समाप्त करने का निर्णय भी लिया है। इनमें नागरिक पुलिस के 8 कांस्टेबल, 1 कांस्टेबल डाक रनर और 2 कांस्टेबल चालक के पद शामिल हैं।
इसके साथ ही विजिलेंस अधिष्ठान में नए पदों की व्यवस्था को मंजूरी भी दी गई है। हेड कांस्टेबल नागरिक पुलिस के 5 पद बढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा एएसआई सिविल पुलिस के 3, हेड कांस्टेबल डाक रनर का 1, हेड कांस्टेबल चालक का 1 और एएसआई चालक का 1 नया पद सृजित किया जाएगा। यानी कुल 6 नए पदों के सृजन को मंजूरी मिली है, जबकि हेड कांस्टेबल नागरिक पुलिस के 5 पदों में वृद्धि होगी।
कैबिनेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 19 की उपधारा (3) के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी दी है। इसके तहत निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को 14 दिन का नोटिस देने के बाद संबंधित मामले में किसी अन्य व्यक्ति को सहायक लोक अभियोजक नियुक्त भी कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत के अनुसार अभियोजन कार्य के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध भी कराना है। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इससे किसी मामले में सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति का रास्ता भी खुल सकेगा।
इसके अलावा मंत्रिमंडल ने विजिलेंस से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी है। यह संशोधन भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद उसकी नई धाराओं व प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य पुराने विजिलेंस संबंधी प्रावधानों को मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप भी बनाना है। इसके लिए अधिसूचना में जरूरी बदलाव किए जाएंगे, जिससे पुराने आईपीसी व सीआरपीसी से जुड़े प्रावधानों और वर्तमान न्यायिक कानूनों के बीच सामंजस्य स्थापित भी किया जा सके।
मंत्रिमंडल के इन फैसलों से विजिलेंस अधिष्ठान के पदों की संरचना में बदलाव के साथ-साथ अभियोजन व्यवस्था व पुराने कानूनी प्रावधानों को नई न्याय संहिताओं के अनुरूप करने की प्रक्रिया को आगे भी बढ़ाया जाएगा।
