Haridwar's increasing crowd, collapsing systems Not a single major project could be completed in three decades
हरिद्वार: धार्मिक नगरी हरिद्वार इन दिनों अपनी क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ का सामना भी कर रही है। हर स्नान पर्व व धार्मिक आयोजन के दौरान हालात इस कदर बिगड़ जाते हैं कि भीड़ नियंत्रण प्रशासन के लिए चुनौती भी बन गया है। सरकार ने बीते दो दशकों में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा भी की, लेकिन निजी स्वार्थ, राजनीतिक विरोध व ज़मीनी स्तर पर समन्वय की कमी ने इन्हें कागजों तक ही सीमित भी कर दिया।
बड़ी परियोजनाएं, अधूरे ख्वाब
हरिद्वार को भीड़ से राहत दिलाने व यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए सरकार ने
- हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो परियोजना
- पॉड टैक्सी योजना
- मनसा-चंडी रोपवे सेवा
- हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर जैसी बड़ी योजनाएं भी घोषित कीं।
लेकिन, प्रत्येक योजना का विरोध या तो धार्मिक संगठनों, व्यापारियों या राजनीतिक दलों के स्तर पर ही हुआ। सरकारी एजेंसियां सर्वे कर लौटीं, प्रस्ताव बने, लेकिन जमीन पर निर्माण की शुरुआत ही नहीं हो सकी।
कांवड़ में प्रशासनिक रिहर्सल, तीज पर हादसा
इस साल कांवड़ मेला प्रशासन के लिए आगामी अर्द्धकुंभ की तरह रिहर्सल था, जिसे सफल भी माना गया। लेकिन तीज पर्व पर आई अप्रत्याशित भीड़ ने व्यवस्थाओं की पोल ही खोल दी। मनसा देवी मंदिर मार्ग पर भगदड़ जैसी स्थिति बनी, और दैनिक श्रद्धालुओं की संख्या हादसे वाले दिन से भी और अधिक पाई गई।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से खाली हुआ पार्किंग क्षेत्र
पंतदीप पार्किंग क्षेत्र, जिसे प्रदेश का पहला पिंक वेंडिंग ज़ोन भी बनाया गया था, अब तक भीड़ नियंत्रण व निकासी मार्ग के लिए बेहद अहम था। लेकिन निजी लाभ व अव्यवस्था के चलते इस क्षेत्र में कब्जे ही जम गए। हाईकोर्ट के आदेश पर ही इसे खाली भी कराया जा सका। अब कई संगठन पुनः कब्जे के प्रयास में जनसमूह को उकसा भी रहे हैं।
हरिद्वार में पैदल चलना भी हुआ मुश्किल
स्नान पर्वों में भीड़ इतनी होती है कि रेलवे स्टेशन से हरकी पैड़ी तक पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। देवपुरा, वाल्मीकि चौक, भगत सिंह चौक से ज्वालापुर तक सड़कें अतिक्रमण की चपेट में भी हैं। फुटपाथ तो गायब ही हो चुके हैं, और मंदिर मार्गों तक दुकानों ने कब्जा भी जमा लिया है। हरकी पैड़ी के ऊपर पहाड़ी में गुफाएं काटकर दुकानें भी बनाई जा रही हैं, लेकिन प्रशासन व वन विभाग आंखें मूंदे ही बैठे हैं।
अब तक की प्रमुख परियोजनाएं और स्थिति:
- हरिद्वार-ऋषिकेश रेल मेट्रो:
सर्वे हुआ, एजेंसियां लौटीं, विरोध में ही अटक गई। - मनसा देवी–चंडी देवी रोपवे:
घोषणा हुई, वर्षों से ठंडी ही पड़ी। - पॉड टैक्सी परियोजना:
दो बार प्लान बदला, अतिक्रमण विरोध में प्रशासन पीछे भी हटा। - हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर:
निशान लगे, खाका तैयार, लेकिन निर्माण पर चर्चा भी नहीं।
