दयारा बुग्याल पर भू-क्षरण का बढ़ता खतरा, 400 हेक्टेयर क्षेत्र संकट में

विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में लगातार बढ़ रहे भू-क्षरण व भूस्खलन ने करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्र को खतरे में ही डाल दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012-13 की आपदा के बाद शुरू हुआ भू-धंसाव अब गंभीर रूप ले चुका है और पिछले दो-तीन वर्षों में नहेटा, चिलपाड़ा, धियाणा व बरनाला क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी खाइयां बन गई हैं।

लगातार हो रहे भू-धंसाव से दयारा बुग्याल की जैव विविधता प्रभावित भी हो रही है, जबकि यहां से बहने वाला मलबा हर वर्ष पापड़गाड नदी में तबाही का कारण बन भी रहा है। इसका असर आसपास के गांवों व गंगोत्री हाईवे तक भी देखने को भी मिल रहा है।

वन विभाग ने वर्ष 2020 में जूट केयर नेट व पिरूल के चेक डैम बनाकर भू-क्षरण रोकने का प्रयास भी किया था, जो सफल रहा। अब विभाग भारतीय वन्यजीव संस्थान व विशेषज्ञों के साथ मिलकर दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए नई और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। स्थानीय लोगों ने भी बुग्याल को बचाने के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग भी की है।