डीएम की कड़ी कार्रवाई: एचडीएफसी एर्गो ने जमा कराया 8.92 लाख, विधवा महिला को दिलाई गई न्याय की राहत

देहरादून: उपभोक्ता हितों की रक्षा को लेकर उत्तराखंड में जिला प्रशासन का सख्त रुख एक बार फिर से सामने आया है। एचडीएफसी एर्गो इंश्योरेंस लिमिटेड ने जिला प्रशासन के नाम ₹8,92,000 का चेक भी जमा कराया है। यह कार्रवाई उस प्रकरण के बाद हुई जिसमें एक विधवा महिला और उसकी 9 वर्षीय बेटी को ऋण–बीमा से जुड़े मामले में लगातार प्रताड़ित भी किया जा रहा था।

जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े निर्देशों के चलते उपभोक्ताओं से ऋण बीमा धोखाधड़ी करने वाली कंपनियां बैकफुट पर दिखाईभी दे रही हैं। प्रशासन की कार्यवाही से पीड़ित महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को राहत और न्याय मिलना भी शुरू हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

15 नवंबर को सुप्रिया नौटियाल ने डीएम सविन बंसल से शिकायत की थी कि उनके पति प्रदीप रतूड़ी ने वाहन खरीदने के लिए एचडीएफसी एर्गो से ₹8,11,709 का ऋण लिया था। बैंक की ओर से बताया गया कि ऋण के साथ बीमा करवाना अनिवार्य है, जिसके तहत पॉलिसी व सुरक्षा प्लस क्लेम नंबर जारी हुआ।

लेकिन बीमा पॉलिसी के दस्तावेज कभी भी सुप्रिया को दिए ही नहीं गए। पति की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम लागू होना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय बैंक द्वारा ऋण चुकाने व वाहन उठाने की धमकी दी जाने लगी।

डीएम की कार्रवाई और कंपनी पर सख्त कदम

शिकायत के बाद डीएम ने जांच कर पाया कि बीमा पॉलिसी सक्रिय होने के बावजूद महिला को प्रताड़ित भी किया गया। इसके बाद डीएम ने एचडीएफसी एर्गो पर ₹8.11 लाख की आरसी जारी करते हुए आदेश भी दिया कि:

“5 दिनों में ऋण समाप्त करो, अन्यथा कंपनी की संपत्ति कुर्क कर नीलामी की जाएगी।”

जिलाधिकारी की इस चेतावनी के बाद एचडीएफसी एर्गो ने ₹8,92,000 का चेक तहसील सदर के नाम जमा कराकर ऋण माफी की प्रक्रिया भी पूर्ण की।

अन्य कंपनियां भी रडार पर

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से ऋण–बीमा धोखाधड़ी करने वाली अन्य बैंक व बीमा कंपनियों में खलबली भी है। कई कंपनियों की पहले ही कुर्की, नीलामी व शाखाओं पर तालाबंदी की कार्रवाई हो चुकी है।

डीएम बंसल ने स्पष्ट कहा है कि—
“बीमित ऋण होने के बाद भी किसी उपभोक्ता को प्रताड़ित भी किया गया, तो कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”