देहरादून में 204 विभागों के मुख्यालय, ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण अब भी खाली

देहरादून: प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीत “सबि धाणी देहरादून, होणी खाणी देहरादून” के बोल उत्तराखंड के सरकारी ढांचे पर काफी हद तक सटीक भी बैठते नजर आ रहे हैं। राज्य में अधिकांश सरकारी विभागों के मुख्यालय देहरादून में ही केंद्रित हैं, जबकि ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराणीसैंण) में राज्य गठन के 25 साल बाद भी किसी बड़े विभाग का मुख्यालय स्थापित ही नहीं हो पाया है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के कुल 265 में से करीब 204 सरकारी विभागों के मुख्यालय देहरादून में ही स्थित हैं, जबकि 22 मुख्यालय नैनीताल में हैं। वहीं रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर व चंपावत जैसे जिलों में एक भी विभाग का मुख्यालय नहीं है।

6 अक्तूबर 2020 को तत्कालीन त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने गैरसैंण में भाषा संस्थान का मुख्यालय स्थापित करने की घोषणा भी की थी। उस समय कहा गया था कि ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद गैरसैंण में अन्य संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू भी होगी। लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी भाषा संस्थान का मुख्यालय गैरसैंण में नहीं बन पाया व अब इसके लिए देहरादून में भूमि तलाशने की बात सामने भी आ रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता एसपी नौटियाल का कहना है कि प्रदेश के लगभग सभी विभागों के मुख्यालय देहरादून में ही स्थापित हैं और नए मुख्यालय भी यहीं पर बनाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था के बेहतर संतुलन के लिए मुख्यालयों का विकेंद्रीकरण भी किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक मुख्यालय पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित होने चाहिए। साथ ही ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में भी कुछ विभागों के मुख्यालय बनने चाहिए थे, जो अब तक नहीं ही हो पाए हैं।