केदार कांठा पर्यटन क्षेत्र को मुख्यमंत्री की हरी झंडी, जरमोला-देवजानी रूट से ट्रैकिंग और तीर्थाटन को मिलेगा नया आयाम

पुरोला : उत्तरकाशी जिले के गडूगाड़ पट्टी स्थित जरमोला, जीवाणु व देवजानी होते हुए केदार कांठा बुग्याल तक के ट्रैकिंग रूट को सीएम पुष्कर सिंह धामी द्वारा पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने की घोषणा से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर भी है। इस कदम से न केवल क्षेत्रीय पर्यटन को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय संस्कृति, तीर्थस्थलों व पारंपरिक मेलों को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी।

ट्रैकिंग के साथ तीर्थ और संस्कृति का संगम

जरमोला-देवजानी से होते हुए केदार कांठा जाने वाला यह 30 किलोमीटर लंबा पैदल ट्रैक प्राकृतिक सौंदर्य व सांस्कृतिक आस्था का अनूठा संगम है। घने बांज, बुरांश व देवदार के जंगलों से होकर गुजरने वाला यह रास्ता वर्षों से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित भी करता रहा है। अब इस रूट को आधिकारिक रूप से पर्यटन क्षेत्र का दर्जा मिलने से सुविधाएं व प्रचार-प्रसार भी बढ़ेगा।

स्थानीयों को मिलेगा लाभ

गडूगाड़ पट्टी के कुमणाई, सतरा, जीवाणु, देवजानी आदि गांवों के ग्रामीण हर वर्ष गर्मियों में अपने मवेशियों के साथ केदार कांठा, मानिर, पुष्टारा बुग्याल व सरूताल क्षेत्रों में डेरा डालते हैं। अब इन ग्रामीणों को पर्यटन से आर्थिक लाभ होने की उम्मीद भी है। साथ ही पर्यटक अब इन गांवों में रहकर ग्रामीण जीवन, मेले-त्योहार व पारंपरिक संस्कृति का अनुभव भी ले सकेंगे।

पैदल ट्रैक पर बसे हैं ऐतिहासिक मंदिर

इस ट्रैक रूट पर खंडा सूरी महाराज, कमलेश्वर महादेव, रामा, कमल सिरांई सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं, जो तीर्थाटन को भी खास भी बनाएंगे। यह रूट धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है।

केदार कांठा पहुंचने के 2 मुख्य रूट

  1. पारंपरिक रूट:
    • पुरोला → मोरी → नेटवाड़ → सौड़ (60 किमी वाहन मार्ग)
    • सौड़ से केदार कांठा (12 किमी पैदल मार्ग)
      (यह मार्ग गोविंद वन्य जीव विहार के प्रतिबंधित क्षेत्र से होकर गुजरता है)
  2. नया घोषित रूट (मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित):
    • पुरोला → जरमोला (18 किमी वाहन से)
    • जरमोला → जीवाणु (10 किमी पैदल)
    • जीवाणु → देवजानी (5 किमी पैदल)
    • देवजानी → गहना (7 किमी पैदल)
    • गहना → केदार कांठा (8 किमी पैदल)
      कुल पैदल दूरी: 30 किमी

स्थानीयों ने जताई खुशी

पूर्व प्रधान जयराम चौहान व जोगेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस घोषणा से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा और वर्षों पुरानी मांग को आखिरकार पूरा भी किया गया है। यह निर्णय क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी साबित हो सकता है।