Assembly session to begin in Gairsain on October 27; state issues to take center stage in the House for two days
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में 27 अक्टूबर से विधानसभा सत्र शुरू होगा। धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम सत्र और चुनावी वर्ष के बीच सदन में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के आमने-सामने आने की संभावना है। पहाड़ों में सर्द हवाओं के बीच सदन के भीतर राजनीतिक गरमाहट देखने को मिल सकती है। सरकार ने विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी की है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जन मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
प्रदेश सरकार ने विधानसभा सत्र के लिए एक बार फिर गैरसैंण को प्राथमिकता दी है। इससे पहले बजट सत्र भी भराड़ीसैंण में आयोजित किया गया था। अक्टूबर में यहां ठंड बढ़ जाती है, लेकिन सत्र के दौरान राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन में बहस गर्म रहने के आसार हैं।
हालांकि, इस बार विधानसभा सत्र की अवधि केवल दो दिन तय की गई है। इस दौरान सरकार को अनुपूरक बजट पेश करने के साथ अन्य विधेयक और विभिन्न विभागों व निगमों की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखनी है। वहीं, विपक्ष प्रदेश से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विधानसभा सत्र में विपक्ष की ओर से जो भी सकारात्मक मुद्दे उठाए जाएंगे, सरकार उनका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सदन में राज्य के विकास से जुड़े मुद्दे उठाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर बिना सिर-पैर वाले, तथ्यहीन और भ्रामक मुद्दों पर अधिक भरोसा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ऐसे मुद्दों पर भरोसा नहीं करती। सरकार हर सकारात्मक मुद्दे का मजबूती से जवाब देने के लिए तैयार है।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रीतम सिंह ने सत्र की अवधि केवल दो दिन रखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे लगता है कि सरकार सदन में जवाब देने से बचना चाहती है। प्रीतम सिंह के मुताबिक, प्रदेश में जनहित के मुद्दों की कमी नहीं है, लेकिन विपक्ष को उन्हें सदन में उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दो दिन के सत्र को लेकर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है, जैसे सरकार विधानसभा सत्र के नाम पर पिकनिक मनाने जा रही है।
अब 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस सत्र में देखना होगा कि अनुपूरक बजट और विधायी कामकाज के बीच प्रदेश के जन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कितनी तीखी बहस होती है।
