Emphasis on uniting the Congress for the 2027 battle; Pritam Singh says, "My heart is with the Congress."
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सियासत में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद यात्रा और जसपुर में उनके साथ चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के मंच साझा करने के बाद पार्टी के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, प्रीतम सिंह ने इन चर्चाओं को ज्यादा तूल न देने की बात कही है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि जसपुर के विधायक आदेश चौहान ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया था और हरीश रावत राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं।
प्रीतम सिंह ने कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही हैं और पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के छोटे कार्यकर्ता हैं, जबकि हरीश रावत वरिष्ठ नेता हैं। सभी को मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई लड़नी है। पार्टी में हर एक कार्यकर्ता की उपयोगिता है और बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।
हरीश रावत को समर्थन देने और उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूती प्रदान करने के सवाल पर प्रीतम सिंह ने कहा कि राजनीति को हर व्यक्ति अपने नजरिये से देखता है। उनका उद्देश्य कांग्रेस को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत के साथ मिलकर काम करने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि सभी नेता एकजुट होकर काम करेंगे, तो 2027 के चुनाव में पार्टी को सफलता मिल सकती है।
प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से हरीश रावत को यात्रा के संबंध में पत्र जारी किए जाने के बावजूद जसपुर के कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रीतम सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम पहले से तय था। प्रभारी का पत्र एक दिन पहले मीडिया में आया था। यदि वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचते, तो इससे गलत संदेश जाता और कांग्रेस के साथ ही स्थानीय विधायक को भी नुकसान उठाना पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में लोगों का उत्साह देखकर लगा कि उत्तराखंड की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। हालांकि, चुनाव के नतीजे ही वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।
कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी खींचतान को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रीतम सिंह ने कहा कि राजनीति उन्हें विरासत में मिली है और इसे संजोकर रखना उनकी जिम्मेदारी है। उनकी प्राथमिकता कांग्रेस को मजबूत करना और 2027 में पार्टी को सत्ता में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर माहौल कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा है। ऐसे में पार्टी नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरें।
हरीश रावत की धन्यवाद यात्रा को लेकर प्रदेश प्रभारी के पत्र पर भी प्रीतम सिंह ने कहा कि हरीश रावत अपनी बात प्रभारी के सामने रख चुके हैं। इस पूरे मामले को बेवजह तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका मन किसके साथ है, इस पर सफाई देने की जरूरत नहीं है। उनका मन कांग्रेस के साथ है और वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
कांग्रेस में परिवारवाद के आरोपों और हरीश रावत की ओर से अपने बेटे के लिए भी टिकट की पैरवी किए जाने संबंधी सवाल पर प्रीतम सिंह ने कहा कि परिवारवाद का नारा लगाना आसान है, लेकिन हर क्षेत्र में पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव देखने को मिलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस घर में डॉक्टर होता है, उसका बेटा भी डॉक्टर बन सकता है। राजनीति में भी लोगों को हर पांच साल में जनता की अदालत में परीक्षा देनी पड़ती है। जनता ही तय करती है कि किसे जीताना है और किसे नहीं। उनके मुताबिक, परिवारवाद के आरोपों का जवाब भी जनता ही देती है।
मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रीतम सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने सभी नेताओं को संयुक्त रूप से चुनाव मैदान में उतरने के निर्देश दिए हैं। चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस विधायक दल और राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर तय करेंगे कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी सौंपी जानी है। उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, उसका निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करेंगे।
