Soldier's wife secures pension rights after 46 years; she was widowed at the age of 19.
पिथौरागढ़ के डीडीहाट की रहने वाली पार्वती देवी को पति की मृत्यु के 46 वर्ष बाद आखिरकार पारिवारिक पेंशन का हक मिल गया। कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात उनके पति मनोहर सिंह की वर्ष 1980 में महज 20 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई थी। उस समय पार्वती देवी की उम्र सिर्फ 19 वर्ष थी और वह चार माह की गर्भवती थीं।
पति की मौत के बाद बेटी को अकेले पाला
मनोहर सिंह की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन उनके पिता के नाम ही हो गई थी। इसके चलते पार्वती देवी को पेंशन का लाभ ही नहीं मिल सका। उन्होंने मायके में रहकर अपनी बेटी जीवंती का अकेले पालन-पोषण किया व बेहद मुश्किल परिस्थितियों में जिंदगी गुजारी।
बेटी जीवंती ने भी बचपन से अपनी मां का संघर्ष भी देखा। शादी के बाद भी जब उन्होंने मां की परेशानी देखी तो उनके हक के लिए लड़ने का फैसला भी किया।
2024 में शुरू हुई पेंशन की पैरवी
वर्ष 2024 में जीवंती ने अपनी मां का मामला पूर्व सैनिक संगठन के सामने भी रखा। इसके बाद संगठन के क्षेत्रीय संयोजक दीवान सिंह ने संबंधित कार्यालयों से संपर्क कर पेंशन से जुड़े दस्तावेजों व प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
लंबी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई के बाद आखिरकार 46 साल पुराना मामला सुलझ गया। पार्वती देवी को अब 18 हजार रुपये मासिक पारिवारिक पेंशन के साथ 8 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिली है।
पूर्व सैनिक संगठन ने जताई खुशी
पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मयूख भट्ट ने कहा कि दिवंगत सैनिक की पत्नी को उनका हक दिलाने की लड़ाई सफल भी हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन भविष्य में भी जरूरतमंद पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए इसी तरह प्रयास भी करता रहेगा।
46 साल के लंबे इंतजार के बाद पार्वती देवी को मिला यह हक उनके व उनकी बेटी के संघर्ष की बड़ी जीत भी मानी जा रही है।
