भारत-तिब्बत व्यापार की ऐतिहासिक किलोंग मंडी फिर चर्चा में, सीमा दर्शन योजना से बढ़ी पर्यटकों की आवाजाही
भारत-चीन सीमा पर स्थित ऐतिहासिक किलोंग मंडी, जो कभी भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख केंद्र थी, अब एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बन रही है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दशकों तक वीरान पड़ी यह मंडी अब सीमा दर्शन योजना के तहत पर्यटकों के लिए खुलने भी लगी है।
नीती गांव से करीब 35 किलोमीटर आगे मखमली बुग्यालों के बीच स्थित इस ऐतिहासिक स्थल तक पहुंचने के लिए प्रशासन की अनुमति भी आवश्यक है। हाल के दिनों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी यहां पहुंचकर इतिहास व प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी लक्ष्मण फरकिया ने बताया कि किलोंग मंडी कभी भारत-तिब्बत व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण मंडियों में भी शामिल थी, लेकिन 1962 के युद्ध के बाद यह पूरी तरह वीरान ही हो गई। अब सीमा दर्शन योजना के जरिए लोगों को अपने पूर्वजों की विरासत व उस दौर के इतिहास को करीब से देखने का अवसर भी मिल रहा है।
ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, इस वर्ष से पर्यटक भी अनुमति लेकर इस क्षेत्र का भ्रमण भी कर रहे हैं। सड़क बनने के बाद यहां पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान भी हो गया है, जिससे सीमांत पर्यटन को भी नई पहचान भी मिल रही है।