Jaspal Rana to be bid a final farewell today; wave of grief across the sports world.
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा को आज अंतिम विदाई भी दी जाएगी। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए देहरादून स्थित आवास पर भी रखा जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी भी ले जाया जाएगा।
जसपाल राणा के आकस्मिक निधन से उनके पैतृक गांव टटोर, नैनबाग चिलामू सहित पूरे क्षेत्र में शोक की भी लहर है। निधन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण व खेल प्रेमी अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए देहरादून में रवाना हो गए।
करीबी मित्रों ने बताया कि जसपाल राणा बेहद सरल व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उनका जन्म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुआ था, जहां उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा आईटीबीपी में तैनात भी थे। शुरुआती शिक्षा मसूरी व दिल्ली में हुई। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने निशानेबाजी का प्रशिक्षण लिया व आगे चलकर देश के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल भी हुए।
उनके करीबी प्रदीप कवि ने बताया कि खेलों के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था और वर्ष 2012 से उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना भी शुरू किया। देहरादून स्थित अपनी शूटिंग रेंज में वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास भी करते थे।
पूर्व खेल राज्य मंत्री नारायण सिंह राणा के 3 बच्चों में जसपाल सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई सुभाष राणा भी अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज व कोच हैं, जबकि बहन सुषमा राणा भी निशानेबाजी से जुड़ी भी रही हैं। उनकी बेटी देवांशी राणा ने विश्व कप प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर परिवार की खेल विरासत को आगे भी बढ़ाया है, जबकि बेटा युवराज भी निशानेबाजी के क्षेत्र में अपना करियर भी बना रहा है।
जसपाल राणा के निधन पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे खेल जगत की अपूरणीय क्षति भी बताया है।
