उत्तराखंड शासन में कैबिनेट प्रस्तावों पर लापरवाही, मुख्य सचिव ने फिर जताई नाराजगी
उत्तराखंड शासन में मंत्रिमंडल के सामने रखे जाने वाले प्रस्तावों की तैयारी को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। लगातार सामने आ रही खामियों के बाद मुख्य सचिव कार्यालय को एक बार फिर हस्तक्षेप भी करना पड़ा है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए सुधार के निर्देश भी जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार कैबिनेट में भेजे जा रहे कई प्रस्तावों में गंभीर त्रुटियां भी पाई जा रही हैं। कुछ प्रस्ताव बिना मंत्री व विभागीय सचिव के हस्ताक्षर के भेजे जा रहे हैं, जबकि कई मामलों में जरूरी कानूनी परीक्षण व परामर्शीय विभागों की सहमति तक नहीं ली गई। इसके अलावा प्रस्ताव समय पर कैबिनेट पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किए जा रहे, जिससे उनका समुचित परीक्षण ही नहीं हो पा रहा।
मुख्य सचिव ने इससे पहले 19 जून 2025 को पत्र जारी कर निर्देश दिए थे कि मंत्रिमंडल बैठक से कम से कम 7 दिन पहले प्रस्ताव मंत्री परिषद विभाग को उपलब्ध भी कराए जाएं। ताकि संबंधित विभाग समय रहते उनका परीक्षण कर सकें व त्रुटियों को दूर किया जा सके।
हालांकि ताजा स्थिति से साफ है कि विभागों ने इन निर्देशों को गंभीरता से ही नहीं लिया। इसी वजह से मुख्य सचिव को दोबारा पत्र भी जारी कर प्रस्तावों में पाई जा रही 10 प्रमुख कमियों का उल्लेख करना पड़ा है।
शासन स्तर पर यह भी चिंता जताई गई है कि अधूरे व त्रुटिपूर्ण प्रस्ताव मंत्रिमंडल की निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री व मंत्रियों द्वारा भी पहले कई बैठकों में ऐसे मामलों पर नाराजगी भी जाहिर की जा चुकी है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि कैबिनेट प्रस्ताव राज्य की नीतियों व बड़े फैसलों की आधारशिला होते हैं। ऐसे में यदि उनकी तैयारी में लापरवाही भी बरती जाती है तो इससे शासन की विश्वसनीयता व जवाबदेही दोनों प्रभावित हो सकती हैं। अब देखने वाली बात होगी कि मुख्य सचिव के नए निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर सुधार भी होता है या नहीं।