Uttarkashi, Chamoli and Pithoragarh have become the biggest disaster hotspots in Uttarakhand.
उत्तराखंड में मानसून से पहले आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के 3 सबसे संवेदनशील जिलों—उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़—को लेकर विशेष अलर्ट भी जारी किया है। विभाग के हालिया सर्वे में इन जिलों को प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से सबसे ज्यादा जोखिम वाला क्षेत्र भी माना गया है।
सैटेलाइट इमेजरी के जरिए किए गए अध्ययन में उन इलाकों की पहचान की गई है, जहां भारी बारिश, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड व भूधंसाव का खतरा अधिक है। अब इन क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कराया जाएगा, ताकि मानसून से पहले संभावित खतरों का विस्तृत आकलन भी किया जा सके।
उत्तरकाशी लंबे समय से भूकंप, बादल फटने व भूस्खलन जैसी आपदाओं का केंद्र रहा है। वर्ष 1991 में आए विनाशकारी भूकंप व 2012 की अस्सी गंगा आपदा ने जिले में भारी तबाही भी मचाई थी। वहीं हाल के वर्षों में धराली जैसी घटनाओं ने भी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर भी किया है।
चमोली जिला भी ग्लेशियर टूटने, भूधंसाव व भूकंप के कारण लगातार चर्चा में रहा है। वर्ष 2021 में ऋषिगंगा फ्लैश फ्लड व 2023 में ज्योतिर्मठ भूधंसाव ने पूरे देश का ध्यान भी खींचा था। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन व अनियोजित निर्माण इन खतरों को और भी बढ़ा रहे हैं।
सीमांत पिथौरागढ़ जिले में भी बादल फटने, फ्लैश फ्लड व काली नदी में बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार सामने भी आती रही हैं। मुनस्यारी व बंगापानी क्षेत्र में हाल के वर्षों में आई आपदाओं ने कई गांवों और संपर्क मार्गों को प्रभावित भी किया।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार ये तीनों जिले हिमालय के अत्यधिक सक्रिय मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जोन में आते हैं, जहां भूगर्भीय हलचल व भूकंप का खतरा अधिक बना रहता है। भारी बारिश, कमजोर चट्टानें व तेजी से बदलता मौसम इन इलाकों को और संवेदनशील भी बना रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मानसून को देखते हुए जिलाधिकारियों के साथ विशेष रणनीति भी तैयार की जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, समय रहते चेतावनी जारी करने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल राहत व बचाव पर्याप्त नहीं होगा। हिमालयी क्षेत्रों में वैज्ञानिक व संतुलित विकास मॉडल अपनाने, अनियोजित निर्माण रोकने और आपदा पूर्व तैयारी मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में बड़ी त्रासदियों से भी बचा जा सके।
