बद्रीनाथ क्षेत्र में बद्री तुलसी की होगी पहली बार व्यावसायिक खेती, 50 हजार पौधे तैयार

बद्रीनाथ धाम के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाली बद्री तुलसी की अब पहली बार व्यावसायिक खेती की तैयारी भी शुरू हो गई है। इसके लिए सेलाकुई स्थित सगंध पौध केंद्र ने तुलसी की नर्सरी तैयार करना भी शुरू कर दिया है। साथ ही तुलसी की पत्तियों से अर्क बनाने की भी योजना भी बनाई जा रही है।

बद्री तुलसी एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका धार्मिक महत्व बेहद ही खास है। इसे भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और बद्रीनाथ मंदिर में पूजा व प्रसाद के रूप में तुलसी की माला भी चढ़ाई जाती है। अब तक यह तुलसी प्राकृतिक रूप से ही उगती थी, लेकिन अब इसे संगठित रूप से उगाने की पहल भी की जा रही है।

सेलाकुई स्थित एरोमा केंद्र में पहली बार बद्री तुलसी की नर्सरी विकसित भी की गई है। यहां तैयार पौधों को स्थानीय लोगों को खेती के लिए उपलब्ध भी कराया जाएगा। बद्री तुलसी में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो मलेरिया, पाचन संबंधी समस्याओं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने व सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों में उपयोगी भी माने जाते हैं।

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालु बद्रीनाथ से प्रसाद के रूप में बद्री तुलसी लेकर भी जाते हैं, लेकिन कच्ची पत्तियों के जल्दी खराब होने की समस्या रहती है। इसे देखते हुए अब तुलसी की पत्तियों से अर्क तैयार करने की योजना भी है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकेगा।

सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान के अनुसार, इस वर्ष करीब 50 हजार पौधे तैयार कर स्थानीय किसानों को भी दिए जाएंगे। इस पहल से जहां बद्री तुलसी को बढ़ावा भी मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों की आय में भी इजाफा होने की उम्मीद भी है।