राज्य की 92 नर्सरियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी, यूरोपियन सब्जियों के उत्पादन पर फोकस

राज्य में उद्यान विभाग की मुरझाई नर्सरियों को दोबारा जीवंत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने इसके लिए विस्तृत योजना तैयार करते हुए प्रत्येक नर्सरी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है। इन नर्सरियों में स्थानीय मांग के अनुसार यूरोपियन सब्जियों के बीज व पौध उत्पादन इकाइयां स्थापित भी की जाएंगी, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता की पौध उपलब्ध भी हो सके।

प्रदेश में उद्यान विभाग की कुल 92 नर्सरियां हैं, जिनमें से कई का पूरा उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। अब इन्हें पुनर्जीवित कर किसानों की जरूरतों के अनुसार विकसित भी किया जाएगा। नोडल अधिकारी स्थानीय फसल चक्र व वार्षिक मांग का आकलन करते हुए 2 साल की अल्प, मध्यम व दीर्घकालिक कार्ययोजना भी तैयार करेंगे।

योजना के तहत बीज, क्लोनल रूट स्टॉक्स व फल पौध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों की आजीविका सुधारने के लिए नर्सरियों में यूरोपियन सब्जियों के उत्पादन के साथ मौन पालन व वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी है।

नर्सरियों की जमीन का मैपिंग कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और पूरी नर्सरी में घेराबंदी भी की जाएगी। अनुपयोगी भूमि को 3 महीने के भीतर खेती योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कर्मचारियों के प्रशिक्षण व ड्रोन से वीडियोग्राफी भी इस योजना का हिस्सा भी होगी।

सचिव एसएन पांडेय के अनुसार, इस पहल से नर्सरियों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को सीधा ही लाभ मिलेगा।