उत्तराखंड के 25 साल: औद्योगिक विकास में नई उड़ान, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकरार
देहरादून: उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशभर में रजत जयंती उत्सव हर्षोल्लास के साथ भी मनाया जा रहा है। इन 25 वर्षों में उत्तराखंड ने उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य व पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेष रूप से औद्योगिक विकास ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दी है। हालांकि, तमाम उपलब्धियों के बावजूद राज्य में अभी भी कुछ चुनौतियां बरकरार हैं, जिनसे निपटना आवश्यक भी है।
औद्योगिक पैकेज से बदली तस्वीर
उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ था। इसके बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य को 10 वर्षों का विशेष औद्योगिक पैकेज भी दिया। उसी के तहत हरिद्वार, उधमसिंह नगर व देहरादून में सिडकुल व सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया जैसे औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए। इस पहल ने राज्य में उद्योगों की तस्वीर ही बदल भी दी।
25 सालों में बड़ा औद्योगिक विस्तार
राज्य गठन के समय जहां सिर्फ 14,202 औद्योगिक इकाइयां थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 93,887 भी हो गई है। सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (MSME) में लगभग 55 हजार करोड़ रुपए का निवेश भी हुआ है और करीब 6 लाख लोगों को रोजगार मिला है। राज्य में फार्मा, ऑटोमोबाइल व आईटी सेक्टर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
निवेश आकर्षित करने की बड़ी पहलें
राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 2018 में इन्वेस्टर समिट व 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर 2023 की समिट में लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू साइन हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट धरातल पर भी उतर चुके हैं।
अब भी बरकरार हैं चुनौतियां
उद्योग जगत की प्रगति के बावजूद राज्य में कई चुनौतियां हैं —
- पर्वतीय क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की रफ्तार धीमी है।
- कई औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली व सड़क सुविधाओं की कमी है।
- स्किल्ड (प्रशिक्षित) युवाओं की कमी भी उद्योगों के विस्तार में बाधक बन रही है।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा, “कुछ जिलों में अत्यधिक उद्योग हैं, जबकि कई जिलों में बहुत ही कम। अब जरूरत है स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर व संसाधनों के बेहतर उपयोग की।”
सरकार की नई पहलें
उद्योग विभाग के सचिव विनय शंकर पांडेय ने बताया कि राज्य गठन के समय उद्योग क्षेत्र का योगदान राज्य की अर्थव्यवस्था में मात्र 17-18% था, जो अब लगभग 50% तक पहुंच भी चुका है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड अब फार्मा, ऑटोमोबाइल व तकनीकी उद्योगों का केंद्र बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह संख्या और भी बढ़ेगी।”
खुरपिया में नया औद्योगिक क्षेत्र बनेगा
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने खुरपिया (हरिद्वार) में 1200 एकड़ में इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित करने की घोषणा भी की है। इस परियोजना में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश व 75 हजार रोजगार सृजन की संभावना है। यहां मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल सेक्टर पर फोकस किया जाएगा।
25 वर्षों में उत्तराखंड ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग भी लगाई है। जहां कभी राज्य की पहचान पर्यटन व कृषि पर निर्भर थी, वहीं अब उद्योग और निवेश इसका नया चेहरा भी बन रहे हैं। हालांकि, पहाड़ी जिलों में समान औद्योगिक विकास व स्किल्ड मैनपावर तैयार करना अब भी सबसे बड़ी चुनौती भी बनी हुई है।