सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पंचायत चुनाव वोटर लिस्ट मामले में उत्तराखंड निर्वाचन आयोग पर 2 लाख का जुर्माना, कांग्रेस ने बताया अपनी जीत
देहरादून: त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की मतदाता सूची को लेकर उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए उसे आधारहीन बताया व आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि आयोग वैधानिक प्रावधानों के विपरीत आदेश जारी करने की हिम्मत ही कैसे कर सकता है।
कांग्रेस का हमला तेज
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग को आड़े हाथों भी लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने कहा कि:
“6 जुलाई 2025 को हमने आयोग को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी कि वोटर लिस्ट में दोहरी प्रविष्टियां (duplicate entries) हैं। अगर 2019 के आदेश का पालन नहीं हुआ तो हम कानूनी रास्ता अपनाएंगे। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हमारी चिंता सही ही साबित कर दी।”
माहरा ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कई ग्रामीण मतदाताओं के नाम शहरी निकायों की सूची में भी दर्ज हैं, जिससे चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल भी खड़े हो रहे थे।
भाजपा पर कांग्रेस का सीधा वार
कांग्रेस वर्किंग कमेटी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा:
“भाजपा ने अपने समर्थकों के नाम ग्राम पंचायत से नगर निकाय वोटर लिस्ट में शिफ्ट कराकर अनुचित लाभ लेने की कोशिश भी की। हाईकोर्ट ने नियम मानने को कहा था लेकिन आयोग ने जानबूझकर नामांकन रद्द ही नहीं किए।”
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका को आधारहीन बताते हुए जिस तरह जुर्माना भी लगाया है, इससे साफ है कि निर्वाचन आयोग ने नियमों की अनदेखी भी की।
क्या था पूरा विवाद?
- राज्य निर्वाचन आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर उन प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने की अनुमति भी दी थी जिनके नाम एक से अधिक वोटर लिस्ट में दर्ज थे।
- इस सर्कुलर को हाईकोर्ट ने रोक भी दिया था।
- आयोग ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने न सिर्फ याचिका खारिज कर दी बल्कि 2 लाख का जुर्माना भी लगा दिया।