Caution... Threat of heavy rain and flood in Uttarakhand Alert in 8 districts, traffic disrupted on 33 roads
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ता ही जा रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज ने राज्य के 8 जिलों में भारी बारिश व बाढ़ की चेतावनी जारी की है। इसके अनुसार टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून, नैनीताल, चंपावत, चमोली, बागेश्वर व पिथौरागढ़ में बाढ़ की आशंका जताई गई है।
इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने संबंधित जिलों को अलर्ट जारी कर सतर्कता व तैयारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
4 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बाकी में येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर व नैनीताल जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां तेज बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना भी है। इसके अलावा अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी करते हुए सामान्य से भारी बारिश व आंधी की चेतावनी दी गई है।
मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल के मुताबिक,
आगामी दिनों में बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रदेशभर में मौसम सुहावना बना रहेगा।
दून में 6.2 डिग्री तापमान की गिरावट
देहरादून में बीते बुधवार को हुई बारिश के चलते तापमान में गिरावट भी आई। अधिकतम तापमान में 6.2 डिग्री की कमी दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री पर रहा। राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में 1.3 एमएम बारिश भी दर्ज की गई। लगातार बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन जलभराव व भूस्खलन की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।
33 सड़क मार्ग बंद, बदरीनाथ हाईवे भी प्रभावित
बारिश के बाद कई इलाकों में मलबा गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे राज्यभर में 33 सड़क मार्ग बंद हो गए हैं।
- ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जोशीमठ से आगे पिनोला घाट पर मलबा आने से बड़े वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 24 मार्ग,
- लोक निर्माण विभाग (PWD) के 6 मार्ग
भी बंद हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही भी बाधित हुई है।
प्रशासन की अपील:
- पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य ही लें।
- नदी किनारे, नालों व भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें।
- आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम से संपर्क भी करें।
प्रदेश में अगले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण भी हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक मुस्तैदी व नागरिकों की सतर्कता ही राहत व बचाव में सबसे अहम साबित भी होगी।
