A woman injured in a leopard attack died due to lack of road, villagers raised the demand for road construction
नैनीताल/मोरा गांव – जंगल में तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल महिला को बचाने के लिए ग्रामीणों ने जान की बाजी लगा दी। उन्होंने महिला को साढ़े तीन किलोमीटर तक पैदल जंगल के रास्ते उठाकर सड़क तक भी पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत ही देर हो चुकी थी। महिला ने आज सोमवार सुबह अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।
ग्राम प्रधान हंसी पलड़िया का कहना है कि यदि गांव तक सड़क होती, तो घायल महिला को समय पर इलाज भी मिल पाता और उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि सड़क न होने के कारण पूर्व में भी गांव में एक नवजात व एक घायल व्यक्ति की जान समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण ही जा चुकी है। पलड़िया ने प्रशासन से मोरा गांव तक जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग भी की है।
वन विभाग अलर्ट, तेंदुए को पकड़ने की कोशिश तेज
घटना के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। विभाग की टीम ने दो क्विंटल वजनी लोहे का पिंजरा 3 किलोमीटर पैदल ले जाकर गांव में स्थापित भी कर दिया है। साथ ही क्षेत्र में ट्रेंकुलाइज़र गन के साथ गश्त भी शुरू कर दी गई है।
वन क्षेत्राधिकारी मुकुल शर्मा ने बताया कि
विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में डटी हुई है और तेंदुए की हर गतिविधि पर नजर भी रख रही है। उनका दावा है कि हमलावर तेंदुआ जल्द ही पकड़ में आ जाएगा।
जंगल में ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए गए
वन विभाग ने तेंदुए की पहचान और उसकी लोकेशन पता लगाने के लिए:
- 2 पिंजरे,
- 8 ट्रैप कैमरे,
- और पंजों के निशानों के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है।
मुआवजे के तौर पर मिलेगा 6 लाख रुपये
इस दुखद घटना के बाद डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि
मृतक महिला के परिवार को आज सोमवार को 6 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम भी उठा रहा है।
ग्रामीणों की पीड़ा: “जब तक सड़क नहीं बनेगी, ऐसे हादसे होते रहेंगे”
स्थानीय लोगों का कहना है कि
जंगल से सटे गांवों में बार-बार वन्यजीवों का खतरा बना ही रहता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव उनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा भी देता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क नहीं बनाई गई, तो वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन भी करेंगे।

