उत्तरकाशी | कूड़ा निस्तारण की मांग को लेकर आंदोलन तेज, जलसमाधि की चेतावनी से मचा हड़कंप
उत्तरकाशी में तांबाखानी क्षेत्र से कूड़ा हटाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान सोमवार को उस वक्त प्रशासन में हड़कंप मच गया, जब आंदोलनकारियों ने जलसमाधि लेने का ऐलान ही कर दिया। एक महीने से धरने पर बैठे आंदोलनकारियों का सब्र तब टूट गया, जब उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई ही नहीं हुई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संतोष सेमवाल ने प्रशासन व नगरपालिका की अनदेखी से आहत होकर गंगा में जलसमाधि लेने का निर्णय भी लिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आंदोलनकारियों को जलसमाधि लेने से भी रोक दिया। इस दौरान पुलिस व आंदोलनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई, वहीं भावुक माहौल भी बन गया। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी ही रहेगा।
सोमवार को कूड़ा निस्तारण की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन व नगरपालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इसके बाद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत संतोष सेमवाल अपने साथियों विष्णुपाल रावत, गोपीनाथ रावत समेत अन्य के साथ जलसमाधि लेने के लिए रवाना भी हुए। साईं मंदिर के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया व नगरपालिका प्रशासन से बातचीत का प्रस्ताव रखा, लेकिन आंदोलनकारी माने ही नहीं।
पुलिस ने आंदोलनकारियों को मणिकर्णिका घाट से पहले ही रोक लिया और नगरपालिका प्रशासन को भी मौके पर बुलाया गया। आंदोलनकारियों का कहना था कि लंबे समय से तांबाखानी क्षेत्र में जमा कूड़ा लोगों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है, लेकिन इसके निस्तारण को लेकर कोई ठोस कदम ही नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें यह कठोर निर्णय लेना पड़ा।
मौके पर पहुंचे नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर आश्वासन भी दिया कि मंगलवार को कार्यकारी अधिकारी आंदोलनकारियों को लिखित में यह भरोसा देंगे कि एक माह के भीतर तांबाखानी क्षेत्र से पूरा कूड़ा हटा भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कूड़ा हटाने का काम चल रहा है, लेकिन 10 वर्षों से जमा कूड़े के निस्तारण में समय लगता है।
आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने जलसमाधि का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित ही कर दिया और धरनास्थल पर लौट आए। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर भी होंगे।