तपोवन के गर्म पानी से अब बनेगी बिजली, उत्तराखंड में शुरू होगा देश का पहला जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट
देहरादून — उत्तराखंड जल्द ही भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) से बिजली उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। तपोवन क्षेत्र में मौजूद गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों को ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त मानते हुए राज्य सरकार ने इस परियोजना को हरी झंडी भी दे दी है। इस पहल से उत्तराखंड देश का पहला राज्य भी बन सकता है जो जियोथर्मल एनर्जी का वाणिज्यिक उपयोग भी करेगा।
आइसलैंड की वर्किस कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों ने तपोवन व आसपास के क्षेत्रों का गहन सर्वेक्षण कर सरकार को रिपोर्ट भी सौंपी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यहां मौजूद गर्म जल स्रोतों में बिजली उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं भी हैं। वर्किस कंपनी के साथ उत्तराखंड सरकार ने इस परियोजना के लिए आधिकारिक करार भी किया है।
77 डिग्री से अधिक तापमान, मिनटों में सैकड़ों लीटर पानी
वर्किस और यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने 25 मार्च से 27 मार्च के बीच क्षेत्र का सर्वे किया। टीम ने 1980 के दशक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा ड्रिल किए गए बोरवेल और हॉट स्प्रिंग्स की जांच भी की। एक बोरवेल से 77.1 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले पानी का प्रवाह 240–300 लीटर प्रति मिनट भी पाया गया, जो ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त भी बताया गया।
टीम के अनुसार, तपोवन की भूतापीय क्षमता से ज्योतिर्मठ क्षेत्र के लगभग 5000 घरों को बिजली आपूर्ति भी संभव है। इसके अलावा राज्य में मौजूद 40 अन्य गर्म जल स्रोतों का भी अध्ययन भी किया जाएगा।
सिर्फ बिजली नहीं, पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने योजना बनाई है कि उन गर्म जल स्रोतों को, जहां बिजली उत्पादन संभव ही नहीं हो सकेगा, स्पा टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें गर्म पानी के स्विमिंग पूल, रिजॉर्ट व अन्य स्वास्थ्य-संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को एक नया आयाम भी मिलेगा।
भारत में 10,600 मेगावाट की संभावना
विश्व स्तर पर अमेरिका, इंडोनेशिया, फिलीपींस जैसे 20 देश पहले ही जियोथर्मल एनर्जी से बिजली भी बना रहे हैं। भारत में भी विशेषज्ञों ने करीब 10,600 मेगावाट भूतापीय ऊर्जा उत्पादन की संभावना पहले ही जताई थी। उत्तराखंड की यह पहल न केवल राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि देश को भी हरित ऊर्जा की दिशा में आगे भी बढ़ाएगी।
कैसे बनती है भू-तापीय ऊर्जा से बिजली
भूतापीय क्षेत्रों में धरती के भीतर गर्म जल स्रोतों से भाप भी निकलती है। इस भाप से टरबाइन घुमाकर बिजली बनाई जाती है। फिर यह भाप वापस जमीन के भीतर इंजेक्ट कर दी जाती है, जिससे पर्यावरण पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता।