Neem cultivation to become a new source of income for farmers; FRI develops a new technique—one tree can yield 30 saplings.
देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के वैज्ञानिकों ने नीम की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के जरिए एक नीम के पेड़ से एक साल में 16 से 30 नए पौधे तैयार किए जा सकेंगे। खास बात यह है कि नए पौधों में मूल पेड़ यानी मदर प्लांट के सभी गुण बरकरार रहेंगे। इससे बड़े स्तर पर नीम के पौधों का उत्पादन आसान होगा और किसानों के लिए इसकी व्यावसायिक खेती के नए रास्ते खुलेंगे।
दरअसल, नीम के तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका इस्तेमाल यूरिया की कोटिंग, साबुन और औषधियां बनाने में किया जाता है। इसी मांग को देखते हुए एफआरआई ने वर्ष 2023 में नीम की छह नई प्रजातियां विकसित की थीं। इन प्रजातियों में जल्दी फूल आने के साथ तेल की मात्रा और कड़वाहट भी अधिक है। हालांकि, इन पौधों को बड़ी संख्या में तैयार करना वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ी चुनौती थी।
वन आनुवंशिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय ठाकुर के मुताबिक, नीम के बीज से करीब 15 दिन में पौधा तैयार हो जाता है, लेकिन पारंपरिक तरीके में एक बीज से केवल एक ही पौधा मिलता है। वहीं, टिश्यू कल्चर तकनीक काफी महंगी है। ऐसे में संस्थान ने करीब एक दशक के शोध के बाद हाइब्रिड माइक्रो कटिंग सिस्टम विकसित किया है। इसमें दोनों विधियों के गुणों को मिलाया गया है, जिससे कम लागत में अधिक पौधे तैयार किए जा सकेंगे।
वहीं, वन आनुवंशिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अशोक कुमार के अनुसार, नीम की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए आय का अच्छा विकल्प बन सकती है। एक नीम के पेड़ से औसतन 50 किलो बीज प्राप्त होता है, जिसकी कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलो है। इस हिसाब से एक पेड़ से सालाना लगभग एक हजार रुपये की आय हो सकती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक एकड़ जमीन में 250 से 300 नीम के पेड़ लगाए जा सकते हैं। इस आधार पर किसान सालाना ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। अब इफ्को के सहयोग से विकसित इस तकनीक को उसे हस्तांतरित करने की तैयारी है, जिससे नीम के पौधों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सकेगा।
