उत्तराखंड में जिनकी जुबान फिसली, उनकी कुर्सी गई… प्रदेश में ऐसे कई सियासतदानों के उदाहरण

राज्य में बयानों के कारण राजनीति में हुए बदलाव, कई नेताओं को भुगतनी पड़ी सजा

राज्य में कई सियासतदानों के लिए जुबान का फिसलना भारी भी पड़ चुका है, जिसके कारण उनकी कुर्सी चली गई या फिर उनका टिकट ही कट गया। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के सीएम पद से इस्तीफे के बाद तीरथ सिंह रावत को राज्य की कमान सौंपी गई थी। हालांकि, तीरथ सिंह रावत की खांटी नेता व सहज छवि के बावजूद उनके फटी जींस जैसे बयानों ने खूब चर्चा भी बटोरी।

इन बयानों के बाद उनका एक के बाद एक बयान और विवादों में घिर गया, और अंततः उनकी कुर्सी ही चली गई। रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी अपने विवादित बयानों के कारण पार्टी के लिए असहज भी हो गए थे। कई बार उनका बयान पार्टी के लिए परेशानी का कारण भी बना था। इसके बाद, उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट ही नहीं दिया गया, और उनका इस्तीफा भी पार्टी से हो गया।

खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बयान भी असहज करने वाले रहे। उन्हें पिछली बार चुनाव में टिकट नहीं दिया गया, जबकि उनकी पत्नी को बीजेपी ने टिकट दिया। यह बदलाव भी उनके बयानों से ही जोड़ा गया था।

अब कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी इसी तरह के बयान के शिकार हुए हैं। उनका एक बयान पिछले माह विवादों का कारण बना, जिससे विरोध प्रदर्शन भी हुए। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें अपना इस्तीफा भी देना पड़ा।

इन घटनाओं से यह साफ होता है कि राजनीति में बयानों का बड़ा असर होता है, और कई बार नेताओं को इसके लिए अपनी कुर्सी तक गंवानी भी पड़ती है।