गंगा दशहरा 2025: दशकों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, गंगा स्नान, दान और तप का मिलेगा कई गुना फल
हरिद्वार। भारतीय संस्कृति व सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर मां गंगा के अवतरण दिवस — गंगा दशहरा का पर्व इस वर्ष 5 जून को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया भी जाएगा। विशेष बात यह है कि इस बार गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग व व्यतिपात योग जैसे दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं, जो दशकों बाद एक साथ दिखाई भी दे रहे हैं।
दुर्लभ योगों में अवतरित हुई थीं मां गंगा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब स्वर्ग लोक से मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन भी हुआ था, तब भी हस्त नक्षत्र, दशमी तिथि, शुक्ल पक्ष, बुधवार, व व्यतिपात योग विद्यमान थे। इस बार भी यही संयोग उपस्थित हैं, जिससे गंगा दशहरा का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ भी गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तप कर मां गंगा को धरती पर लाने का आग्रह भी किया था। तभी से मां गंगा न केवल जीवनदायिनी बल्कि मोक्षदायिनी भी मानी जाती हैं।
स्नान, दान, जप और व्रत से मिलेगा विशेष पुण्य
ज्योतिषाचार्य उदय शंकर भट्ट के अनुसार,
इस बार के योग इतने दिव्य हैं कि गंगा में स्नान, दान, जप, तप व व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलेगा। यह पर्व आत्मशुद्धि, तन-मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अनूठा अवसर भी है।
गंगा दशहरा पर ये कार्य करने से बचें
- शरीर का मैल गंगा में नहीं धोएं, यह पाप के बराबर माना जाता है।
- कपड़े न धोएं, इससे जल प्रदूषण होता है।
- प्लास्टिक या अन्य अपशिष्ट पदार्थ गंगा में न डालें।
- स्नान के बाद गंगा में घी का दीपक प्रवाहित करना पुण्यकारी होता है।
गंगा: भारतीय संस्कृति की रीढ़
गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतीक भी है। मां गंगा को कल्याणकारी, मोक्षदायिनी व सांस्कृतिक चेतना का केंद्र भी माना गया है। गंगा दशहरा का पर्व हमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के पालन की प्रेरणा भी देता है।