भाजपा ने वक्फ बिल पर विपक्षी विरोध को मुस्लिम समाज को गुमराह करने की कोशिश बताया
भाजपा ने विपक्ष द्वारा प्रस्तावित वक्फ बिल पर किए जा रहे विरोध को मुस्लिम समाज को गुमराह करने का प्रयास करार दिया है। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल किया कि जब वक्फ कानून और इसके पहले किए गए संशोधन संविधान सम्मत हो सकते हैं, तो वर्तमान वक्फ संशोधन बिल असंवैधानिक कैसे हो सकता है?
महेंद्र भट्ट ने सदन में जेपीसी की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, “सभी जानते हैं कि इस संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद भी वक्फ संपत्तियों की एक इंच भी जमीन नहीं जाने वाली है। फिर भी कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर अफवाह और झूठ फैलाकर मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि संविधान निर्माण के समय इस कानून पर चर्चा की गई थी, लेकिन संविधान निर्माताओं ने इसे नकार दिया था। इसके बावजूद 1954 में वक्फ बोर्ड कानून पारित हुआ और इसके बाद 1955, 1995, और 2013 में संविधान संशोधन कर इसे असीमित अधिकार भी दिए गए।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि ये सभी कदम संविधान के अनुसार थे, तो वर्तमान में प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक कैसे संविधान विरोधी हो सकता है। जेपीसी की बैठकों में विपक्षी दलों से इन मुद्दों पर सुझाव लिए गए थे और रिपोर्ट की डिसेंट नोट में इन सुझावों को दर्ज किया गया है, लेकिन विपक्षी दलों ने रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले ही उस पर भ्रम फैलाना शुरू कर दिया है।
महेंद्र भट्ट ने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि वक्फ विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पेशेवर बनाना, उसमें पारदर्शिता लाना, और यह सुनिश्चित करना है कि वक्फ बोर्ड की शक्तियों का दुरुपयोग किसी गैरकानूनी जमीन पर न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन संस्थाओं के पास स्पष्ट स्वामित्व है और जो वर्षों से उपासना स्थल के रूप में अस्तित्व में हैं, उन्हें नए वक्फ कानून से डरने की जरूरत नहीं है।
अंत में उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसा और कहा कि “जंतर मंतर पर बैठकर धमकी वाली बयानबाजी करने वाले वो दल जो हमेशा भय फैलाने पर आधारित राजनीति करते हैं, इस बार भी मुसलमानों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अब जनता इनके झांसे में नहीं आएगी और सरकार वक्फ संशोधन बिल को सदन से पास कराने में सफल भी होगी।”