Opening private universities in Uttarakhand to become easier; land norms for hilly areas revised.
देहरादून। उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को आसान बनाने के लिए धामी सरकार ने भूमि संबंधी मानकों में बदलाव को भी मंजूरी दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति व मानकों में संशोधन को स्वीकृति दी गई है। इसका सबसे ज्यादा लाभ पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय स्थापित करने के इच्छुक संस्थानों को मिलने की उम्मीद भी है।
संशोधित व्यवस्था के तहत अब पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र जरूरी भी होगा। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में यह सीमा 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र निर्धारित भी की गई है। सरकार के अनुसार, उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए भूमि के बजाय निर्मित क्षेत्र को आधार बनाने से पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय स्थापित करना अधिक व्यावहारिक भी हो सकेगा।
मौजूदा व्यवस्था में पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय के लिए 2.5 एकड़ भूमि 5 किलोमीटर की परिधि में अधिकतम 3 स्थानों पर उपलब्ध होना जरूरी था। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में 10 एकड़ भूमि का मानक निर्धारित भी था। कैबिनेट ने अब इन भूमि मानकों के स्थान पर निर्मित क्षेत्र को आधार बनाने का फैसला भी किया है।
वित्तीय मानकों में भी बदलाव भी किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए तीन करोड़ रुपये व मैदानी क्षेत्रों के लिए 5 करोड़ रुपये की स्थायी विन्यास निधि से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही बैंक खाते में मैदानी क्षेत्रों के लिए न्यूनतम 20 करोड़ रुपये व पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 2 करोड़ रुपये रखने की व्यवस्था को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन के मानक भी तय करने का फैसला किया है। अब संस्थानों की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावों का निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर मूल्यांकन भी किया जाएगा।
सरकार के इस संशोधन का उद्देश्य एक ओर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया को भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक भी बनाना है, वहीं दूसरी ओर नए संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट मूल्यांकन व्यवस्था भी तैयार करना है।
