Suspicious call center operating via illegal SIM box busted in Dehradun; 2 arrested, 39 young men and women also found.
देहरादून में एसटीएफ व देहरादून पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध सिम बॉक्स के जरिए संचालित एक संदिग्ध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ भी किया है। जीएमएस रोड स्थित कमला पैलेस के पास कैरियर हाउस बिल्डिंग में संचालित SINGH ASSET RECON SERVICES PRIVATE LIMITED यानी SARS के कार्यालय में साइबर क्राइम पुलिस व दूरसंचार विभाग की टीम ने छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कंपनी के मैनेजर व रीजनल मैनेजर को गिरफ्तार किया है। मौके से 32 स्लॉट वाला DINSTAR सिम बॉक्स, 45 सिम कार्ड, लैपटॉप, 2 राउटर, 2 एटीएम कार्ड समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
एसटीएफ को मिली सूचना के बाद टीम ने पहले मामले की जांच की और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए। इसके बाद दूरसंचार विभाग को साथ लेकर कॉल सेंटर पर छापा भी मारा गया।
जांच के दौरान लैपटॉप से SBI, BOB, AXIS BANK, POONAWALLA FINANCE, YES BANK व RBL समेत कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से जुड़ा डेटा मिलने की बात सामने भी आई है।
पुलिस ने इस मामले में लक्ष्मण प्रसाद, निवासी महोबा, उत्तर प्रदेश व वर्तमान निवासी चंद्रमणी, देहरादून को गिरफ्तार किया है। लक्ष्मण प्रसाद को कंपनी का मैनेजर भी बताया गया है। वहीं, दूसरे आरोपी जगमोहन सिंह रावत, निवासी नई दिल्ली को रीजनल मैनेजर बताया गया है।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि कॉल सेंटर से लोगों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने व उससे जुड़े लाभ बताने के नाम पर कॉल की जाती थी। आरोप है कि कई मामलों में ग्राहकों से जल्द पैसे जमा कराने के लिए दबाव बनाने और धमकी देने की शिकायतें सामने आईं।
पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर में 39 युवक-युवतियां कमीशन के आधार पर ही काम कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि कॉल सेंटर में निर्धारित 1600 नंबर सीरीज का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा था। इसके बजाय व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को कॉल भी की जा रही थी।
एसटीएफ के मुताबिक, सिम बॉक्स के जरिए कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान व कॉल के स्रोत को छिपाया जा सकता है। ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल धोखाधड़ी व अन्य आपराधिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका रहती है।
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया है और आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 319(1), 61(2), 3(5), IT Act की धारा 66(C), 66(D) और दूरसंचार अधिनियम की धारा 42(1), 42(3) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच भी की जा रही है।
