The entire rafting system in Rishikesh is set to change; a ₹100-crore project will overhaul everything from safety and parking to the booking process.
गंगा की लहरों पर राफ्टिंग… ऋषिकेश की पहचान भी है और पर्यटन अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा भी। लेकिन अब राफ्टिंग सिर्फ नदी में रोमांच तक सीमित नहीं रहने वाली। इसे बुकिंग, पार्किंग, राफ्ट स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, ट्रैफिक, गाइड ट्रेनिंग और सुरक्षा से जोड़कर एक व्यवस्थित सिस्टम तैयार करने की कवायद चल रही है।
ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। यह काम ‘आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण की लागत करीब 44.04 करोड़ रुपये, जबकि दूसरे चरण के लिए 56 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।
पहले चरण में जानकी सेतु के पास पांच मंजिला इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC और शिवपुरी में फैसिलिटी सेंटर बनाया जा रहा है। वहीं दूसरे चरण में शिवपुरी में राफ्ट स्टोरेज वेयरहाउस, पार्किंग और नीम बीच पर पार्किंग समेत दूसरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
जमीनी प्रगति की बात करें तो सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकी सेतु स्थित ICCC का काम करीब 30 प्रतिशत तक पहुंचा है। इसका टेंडर लगभग 31.64 करोड़ रुपये का है। काम अगस्त 2025 में शुरू हुआ था और अगस्त 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय के बाद भी निर्माण जारी है।
शिवपुरी फैसिलिटी सेंटर की प्रगति करीब 1 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं नीम बीच फैसिलिटी सेंटर, जिसकी अनुमानित लागत करीब 8.36 करोड़ रुपये है, का सितंबर तक टेंडर भी जारी नहीं हुआ था। दूसरे चरण में शिवपुरी राफ्ट स्टोरेज वेयरहाउस का काम करीब 5 प्रतिशत तक पहुंचा है।
राफ्टिंग से जुड़े रास्तों को बेहतर करने के लिए करीब 26.85 करोड़ रुपये के रोड डेवलपमेंट कार्य भी प्रस्तावित हैं। नीम बीच रोड और शिवपुरी रोड के टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
परियोजना का दायरा सिर्फ राफ्टिंग तक सीमित नहीं है। करीब 4,698 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आइकॉनिक सिटी प्रोजेक्ट में त्रिवेणी घाट, आस्था पथ, पार्किंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ICCC, ISBT, चारधाम रजिस्ट्रेशन सेंटर, रोड री-मॉडलिंग, रिवरफ्रंट और राफ्टिंग डेवलपमेंट जैसे काम शामिल हैं।
पर्यटन विभाग के मुताबिक आने वाले समय में पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। राफ्ट बुकिंग, राफ्ट स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन को भी एक इंटीग्रेटेड सिस्टम से जोड़ने की योजना है। ऋषिकेश में फिलहाल कई राफ्टिंग यूनियन और एसोसिएशन काम कर रहे हैं और इन्हें एक बड़े अम्ब्रेला एसोसिएशन के तहत लाने को लेकर भी बातचीत चल रही है।
राफ्टिंग कारोबार में सुरक्षा को लेकर भी बदलाव किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था में राफ्टिंग गाइड की अधिकतम उम्र सीमा 50 से बढ़ाकर 60 साल की गई है, हालांकि इसके लिए गाइड का शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी होगा। साथ ही CPR और फर्स्ट एड ट्रेनिंग को भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
ऋषिकेश क्षेत्र में करीब 700 से 800 राफ्टिंग गाइड बताए जाते हैं। इनमें से करीब आधे गाइड्स को पिछले राफ्टिंग सीजन में CPR और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। आने वाले समय में ट्रेकिंग रूट्स से जुड़े गाइड और टूर ऑपरेटर्स को भी उनके जिलों में ऐसी ट्रेनिंग देने की तैयारी है।
ट्रैफिक और सर्विलांस को भी इस पूरी व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। करीब 121.55 करोड़ रुपये के प्रस्तावित ICCC फॉर सिटी सर्विलांस में ट्रैफिक मॉनिटरिंग, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन, रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन, ओवरस्पीड डिटेक्शन और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इसका दायरा ऋषिकेश के साथ मुनिकीरेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम तक बताया गया है।
राफ्टिंग कारोबार की आर्थिक अहमियत भी बड़ी है। पर्यटन विभाग के मुताबिक ऋषिकेश में करीब 260 रजिस्टर्ड फर्म हैं और हर साल लगभग 4.5 लाख पर्यटक राफ्टिंग के लिए आते हैं। कौड़ियाला से ऋषिकेश तक करीब 36 किलोमीटर के राफ्टिंग स्ट्रेच से सालाना 200 से 300 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान बताया गया है।
हालांकि इस बड़े बदलाव के रास्ते में चुनौतियां भी हैं। कई निर्माण कार्य अभी शुरुआती चरण में हैं। जमीन और साइट क्लीयरेंस, पुराने ढांचों को हटाने, दुकानों की सुरक्षा, पानी और सीवर की समस्या और निर्माण वाहनों की आवाजाही जैसी वजहों से कुछ काम प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ ऑब्जर्वेशन भी दर्ज किए गए हैं।
यानी तस्वीर साफ है—ऋषिकेश में राफ्टिंग का भविष्य सिर्फ गंगा की लहरों पर नहीं, बल्कि उसके आसपास तैयार होने वाले पूरे सिस्टम पर टिका है। करीब 100 करोड़ रुपये का रिवर राफ्टिंग प्रोजेक्ट इसी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है, जहां रोमांच के साथ सुरक्षा, सुविधा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और व्यवस्थित पर्यटन को एक ही सिस्टम में लाने की कोशिश की जा रही है।
