Nanda Devi National Park Insights into the health of the Himalayas
हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसा नंदा देवी नेशनल पार्क… जहां दशकों से मानवीय गतिविधियां सीमित हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिकों के लिए ये इलाका हिमालयी इकोसिस्टम को समझने के लिए एक तरह की प्राकृतिक प्रयोगशाला बन गया है।
2026 के ‘नंदा देवी बायोस्फीयर डिकेडल मॉनिटरिंग अभियान’ की रिपोर्ट ने इस क्षेत्र की जैव-विविधता की एक विस्तृत तस्वीर सामने रखी है। सर्वे में कम से कम 490 पौधों की प्रजातियां, 96 लाइकेन टैक्सा, 20 स्तनधारी और 125 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। खास बात ये है कि दर्ज किए गए 96 लाइकेन टैक्सा में से 70 पार्क के लिए नए रिकॉर्ड हैं। वहीं बीच मार्टेन को पहली बार यहां दर्ज किया गया है।
वन्यजीवों की बात करें तो ब्लू शीप 9 में से 7 सर्वे क्षेत्रों में मिली, जबकि स्नो लेपर्ड 4 क्षेत्रों में दर्ज किया गया। सर्वे के दौरान पातालखान-सर्सोपातल क्षेत्र में स्नो लेपर्ड द्वारा ब्लू शीप के शिकार का प्रमाण भी मिला, जो इस इलाके में प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला के सक्रिय होने की अहम जानकारी देता है।
नंदा देवी नेशनल पार्क को 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था और 1983 में यहां ट्रेकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया। 1988 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके बाद 1993, 2003, 2015 और अब 2026 में जैव-विविधता की निगरानी की गई है।
वनस्पतियों की बात करें तो पार्क में 451 एंजियोस्पर्म, 7 जिम्नोस्पर्म और 32 से ज्यादा फर्न व टेरिडोफाइट समेत कम से कम 490 संवहनी पौधों की प्रजातियां दर्ज हुई हैं। बर्च, फर और सॉर्बस यहां की प्रमुख वृक्ष प्रजातियों में शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जंगल की संरचना और प्रजातीय संरचना में 2015 के मुकाबले कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं मिला। पेड़ों के गिरने से बने गैप में फर के नए पौधों का पुनर्जनन भी दर्ज हुआ है।
इस सर्वे की एक बड़ी उपलब्धि लाइकेन की पहली व्यापक साइट-वाइज इन्वेंट्री है। 96 लाइकेन टैक्सा दर्ज किए गए, जिनमें 70 पार्क के लिए नए हैं। देओदी क्षेत्र में 47 और डुब्रिगेथा में 44 लाइकेन टैक्सा मिले। लाइकेन की विविधता जंगल की निरंतरता और पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझने में उपयोगी संकेतक मानी जाती है।
नंदा देवी सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों का भी प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र है। सर्वे में 84 औषधीय पौधों की प्रजातियां दर्ज हुईं, जिनमें अतीस, जटामासी और कुटकी जैसी हिमालयी वनस्पतियां शामिल हैं। रिपोर्ट ने कुछ प्रजातियों पर बाजार की मांग और अवैध संग्रह के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया है।
वन्यजीवों में कस्तूरी मृग करीब 4200 मीटर की ऊंचाई तक दर्ज किया गया। वहीं 2026 के सर्वे में 125 पक्षी प्रजातियां और 39 परिवार रिकॉर्ड किए गए। इनमें Egyptian Vulture, Bearded Vulture, Himalayan Vulture, Mountain Hawk-Eagle और Cheer Pheasant जैसी संरक्षण महत्व वाली प्रजातियां भी शामिल हैं।
हालांकि रिपोर्ट का फोकस सिर्फ प्रजातियों की गिनती तक सीमित नहीं है। इसमें जैव-विविधता की लगातार निगरानी की जरूरत पर जोर दिया गया है। कोर क्षेत्र में हर पांच साल और बाहरी क्षेत्रों में नियमित निगरानी की सिफारिश की गई है। इसके लिए कैमरा ट्रैप, हाई-एल्टीट्यूड कैमरा, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और एआई आधारित मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।
कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए इस व्यापक सर्वे ने नंदा देवी के जंगलों, वनस्पतियों और वन्यजीवों की मौजूदा स्थिति का नया रिकॉर्ड तैयार किया है। 490 से ज्यादा पौधों की प्रजातियां, 20 स्तनधारी, 125 पक्षी और 96 लाइकेन टैक्सा… ये आंकड़े नंदा देवी को हिमालयी जैव-विविधता की निगरानी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक संदर्भ क्षेत्र के रूप में सामने लाते हैं।
