उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादले फिर अटके, 30 जून की डेडलाइन पर संशय

उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया एक बार फिर अधर में लटकती भी नजर आ रही है। शासन ने गंभीर बीमारी, दिव्यांगता व विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों के प्रस्तावों पर कार्रवाई की मंजूरी भी दे दी है, लेकिन अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम व सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में होने वाले तबादलों पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।

शासन के आदेश के अनुसार धारा 27 के तहत 4 प्रधानाचार्यों, 91 प्रवक्ताओं, 97 सहायक अध्यापक एलटी (गढ़वाल मंडल) व 73 सहायक अध्यापक एलटी (कुमाऊं मंडल) के तबादला प्रस्तावों पर स्थानांतरण समितियां कार्रवाई भी करेंगी। इनमें गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, विधवा-विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित और माता-पिता या बच्चों की गंभीर बीमारी जैसे मामलों को शामिल किया गया है।

वहीं, अनुरोध आधारित तबादलों के मामलों को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श के बाद अलग आदेश जारी कर निपटाया भी जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तबादलों के लिए निर्धारित अंतिम तिथि 30 जून तक प्रक्रिया पूरी होना मुश्किल ही है, इसलिए शासन से समय बढ़ाने का अनुरोध भी किया गया है।

स्थिति को और जटिल इस वजह से भी माना जा रहा है कि तबादलों के लिए अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आवश्यक अनुमति  हीनहीं ली गई है। राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के चलते चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध लागू है।

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के अनुसार जिन प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, वे पिछले वर्ष के लंबित मामले भी हैं। इनके साथ नए आवेदन भी आमंत्रित किए जाएंगे और तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग भी की जाएगी।