गैरसैंण में खुशनुमा मौसम, लेकिन स्थायी राजधानी के सपने अभी अधूरे

देहरादून/गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण क्षेत्र में इन दिनों मौसम काफी सुहावना भी है। बांज व बुरांस के जंगलों से घिरी पहाड़ियों के बीच दिन में सुनहरी धूप व सुबह-शाम हल्की ठंड का अहसास लोगों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि राज्य आंदोलन की भावना के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का सपना अब भी अधूरा ही दिखाई दे रहा है।

इन दिनों विधानसभा सत्र के चलते पूरी सरकार भरारीसैंण विधानसभा परिसर में ही मौजूद है। सत्र में मंत्री, विधायक व वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे हैं। सत्र की व्यवस्थाओं व सुरक्षा के लिए सैकड़ों कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं। सदन के भीतर जहां जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है, वहीं सदन के बाहर लोगों की जुबान पर यही सवाल है कि सत्र कब ही समाप्त होगा।

भराड़ीसैंण में अवस्थापना विकास के कार्य जरूर चल रहे हैं, लेकिन स्थायी राजधानी के सपने को साकार करने के लिए अभी काफी काम भी बाकी है। यहां ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग जल्द ही लौटने की तैयारी में भी रहते हैं।

सरकार की ओर से गैरसैंण को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है, लेकिन इसे धरातल पर उतरने में अभी समय भी लग सकता है।

सरकार ने विधानसभा सत्र की अवधि 13 मार्च तक भी तय की है। दूसरी ओर विपक्ष लगातार सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग भी कर रहा है। सरकार का कहना है कि विपक्ष नहीं चाहता कि सदन सुचारू रूप से ही चले, जबकि नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि सरकार खुद गैरसैंण में अधिक समय तक रुकना नहीं चाहती और बजट सत्र को जल्द ही खत्म किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि बजट पर विस्तार से चर्चा भी होनी चाहिए।

इस बीच बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी भी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जनभावनाओं का प्रतीक भी है। यहां सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं व अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास भी होना जरूरी है।