मानव–वन्यजीव संघर्ष तेज, बाघ हमलों में बढ़ोतरी से चिंता

राज्य में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। भालू के बाद अब बाघ के हमलों में भी तेजी आई है। इस महा में अब तक वन्यजीवों के हमलों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 4 मौतें बाघ के हमलों में ही दर्ज की गई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में 68 लोगों की जान भी गई थी, जबकि 488 लोग घायल भी हुए थे। इस दौरान पशु, फसल व मानव क्षति के कई मामले सामने आए। भालू के हमलों की घटनाएं भी तुलनात्मक रूप से अधिक ही रहीं। तापमान गिरने के साथ भालुओं के हाइबरनेशन में जाने व हमलों में कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन अभी भी भालू के हमलों की घटनाएं सामने भी आ रही हैं।

19 दिनों में चार मौतें, बाघों का बढ़ता खतरा

इसी माह महज 19 दिनों के भीतर बाघ के हमलों में 4 लोगों की मौत हो चुकी है। ये घटनाएं कालागढ़ टाइगर रिजर्व, रामनगर व तराई पूर्वी वन प्रभाग क्षेत्र में सामने आई हैं। वहीं, तेंदुओं के हमलों में भी 2 लोगों की जान गई है—एक महिला की मौत नैनीताल वन प्रभाग में हुई, जबकि दूसरी घटना बाड़ा गांव में दर्ज भी की गई।

पिछले साल भी चिंताजनक रहे आंकड़े

साल 2025 में बाघ के हमलों में 12 लोगों की मौत हुई थी और 5 लोग घायल हुए थे। वहीं तेंदुओं के हमलों में 19 मौतें व 102 लोग घायल हुए थे।

सावधानी बरतने की अपील

प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने बताया कि

यह समय बाघों के प्रजनन का है, ऐसे में जंगलों में जाने से बचना भी चाहिए। यदि आवश्यक कार्यवश जंगल जाना पड़े, तो पूरी सतर्कता बरतें—समूह में जाएं, आवाज करते रहें और सुरक्षा नियमों का पालन भी करें। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ वन विभाग द्वारा सुरक्षात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं।