उच्च हिमालय में सीबकथोर्न खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, सरकार बना रही योजना
देहरादून। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय गुणों से भरपूर सीबकथोर्न फल का उत्पादन किसानों की आर्थिकी को मजबूत भी करेगा। प्रदेश सरकार सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना भी तैयार कर रही है। पिथौरागढ़ जिले की दारमा व व्यास घाटी में वन विभाग ने इसकी खेती को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू भी कर दी है।
सीबकथोर्न न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है, बल्कि भूमि कटाव रोकने में सहायक है। रेतीली भूमि वाले उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इसकी जड़ें मिट्टी संरक्षण में अहम भूमिका भी निभाती हैं। व्यास घाटी के गरव्यांग गांव में इसके अधिक उत्पादन की संभावना भी जताई जा रही है।
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की सहायता से धारचूला विकासखंड की दारमा, व्यास व चौदास घाटियों में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि प्रदेश में इसका उत्पादन अभी सीमित ही है। बाजार में सीबकथोर्न फल से तैयार जूस की कीमत 500 रुपये प्रति लीटर तक भी पहुंच रही है।
सरकार का मानना है कि सीबकथोर्न की खेती से पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी व टिहरी जैसे पर्वतीय जिलों के किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। इसे ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि (रीप) योजना के तहत बढ़ावा भी दिया जाएगा।