Hooliganism will not be tolerated in the name of loan recovery, NCIB explains legal rights - No need to fear even if you are unable to pay EMI
देहरादून/हरिद्वार: कुछ वर्ष पहले हरिद्वार में एक युवक की स्कूटी को जबरन छीन लिए जाने का एक मामला सामने आया था। कोरोना लॉकडाउन के दौरान ईएमआई न भर पाने पर फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट युवक के घर पहुंचे व स्कूटी ही जब्त कर ले गए। मामला कोर्ट पहुंचा, और द्वितीय अपर सिविल जज (न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने इस घटना को गंभीर मानते हुए रिकवरी एजेंटों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करने के आदेश दिए थे।
लेकिन इस तरह की घटनाएं यहीं नहीं थमी हैं। देशभर के साथ-साथ उत्तराखंड में भी ऐसे कई मामले लगातार ही सामने आ रहे हैं, जहां लोन या ईएमआई न चुकाने की स्थिति में रिकवरी एजेंट गुंडागर्दी व मानसिक उत्पीड़न पर भी उतर आते हैं।
NCIB की चेतावनी और सलाह
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए आम लोगों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया है। ब्यूरो का कहना है कि—
“अगर आप किसी निजी या आर्थिक परेशानी के चलते EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो घबराएं नहीं। रिकवरी एजेंट अगर बदसलूकी करते हैं, धमकाते हैं या जबरन वाहन या सामान छीनते हैं, तो यह गैरकानूनी है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।”
लोगों से की गई अहम अपील
NCIB ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने वित्तीय अधिकारों के प्रति जागरूक भी रहें और ऐसी किसी भी जबरदस्ती या मानसिक प्रताड़ना का डटकर विरोध भी करें। रिकवरी एजेंट आपके घर आकर न तो बदसलूकी कर सकते हैं, न ही आपकी संपत्ति को जबरन कब्जे में भी ले सकते हैं, जब तक कि उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी ही न हो।
क्या करें अगर रिकवरी एजेंट परेशान करें?
- बातचीत रिकॉर्ड करें या गवाह रखें
- पुलिस को तुरंत सूचित करें
- बैंक की शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग करें
- रिज़र्व बैंक या उपभोक्ता फोरम में शिकायत करें
- जरूरत पड़ने पर कोर्ट का रुख करें
साइबर फ्रॉड भी बढ़े
इसी के साथ राज्य में साइबर ठगी के मामले भी तेजी से ही बढ़े हैं। पुलिस लगातार जागरूकता अभियान भी चला रही है, फिर भी लोग ठगों के जाल में फंस रहे हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी फाइनेंस या लोन एप्लीकेशन को बिना जांच-परख के इस्तेमाल न करें व किसी को भी ओटीपी या बैंक जानकारी भी साझा न करें।


