उत्तराखंड में उपनल कर्मियों को नहीं किया जाएगा बाहर, नियमितीकरण के लिए बनेगी नियमावली, सात सदस्यीय समिति गठित
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने उपनल कर्मियों (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए साफ किया है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों को अब हटाया नहीं जाएगा। बीते बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर औपचारिक चर्चा भी की गई, जिसमें सभी मंत्री इस दिशा में एकमत नजर भी आए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि उपनल कर्मियों के लिए एक नियमावली भी तैयार की जा रही है, ताकि उन्हें नियमित किया जा सके। सीएम पुष्कर सिंह धामी पहले ही इस संबंध में सार्वजनिक घोषणा भी कर चुके हैं।
क्या है उपनल कर्मियों की स्थिति?
प्रदेश के कई विभागों में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के रूप में उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मी वर्षों से कार्यरत भी हैं। लेकिन इनकी सेवाएं अस्थायी ही मानी जाती रही हैं। अब सरकार इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रही है।
हालांकि, यह काम इतना आसान तो नहीं है क्योंकि—
- अधिकांश उपनल कर्मी नियमित पदों के सापेक्ष तैनात हैं।
- कई पद ऐसे हैं, जिनकी भर्ती प्रक्रिया लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है।
- नियमितीकरण के लिए आरक्षण व सीधी भर्ती संबंधी नियमों में बदलाव भी आवश्यक होगा।
नियमावली तैयार करने को बनी समिति
कैबिनेट ने उपनल कर्मियों को नियमित करने के लिए नियमावली तैयार करने का निर्णय भी लिया है। इसके लिए प्रमुख सचिव आरके सुधांशु की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में निम्न अधिकारी शामिल हैं:
- प्रमुख सचिव, न्याय: प्रशांत जोशी
- सचिव, कार्मिक: शैलेश बगौली
- सचिव, वित्त: दिलीप जावलकर
- सचिव, सैनिक कल्याण: दीपेंद्र कुमार चौधरी
- सचिव: श्रीधर बाबू अद्दांकी
- उपनल के प्रबंध निदेशक
यह समिति सभी विधिक व प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर नियमावली का ड्राफ्ट भी तैयार करेगी, जिसे कैबिनेट की अगली बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत भी किया जाएगा।
कैबिनेट की मंशा साफ: कोई उपनल कर्मी नहीं हटेगा
बैठक में यह भी कहा गया कि जब सरकार खुद उपनल कर्मियों को नियमित करने की दिशा में गंभीर प्रयास भी कर रही है, तो ऐसे में विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों को भी हटाया न जाए। यह निर्णय उपनल कर्मियों को राहत देने वाला है, जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग भी कर रहे थे।