छोटे अपराधों पर अब जेल नहीं, सरकार लाई उत्तराखंड जन विश्वास अध्यादेश 2025
देहरादून में धामी कैबिनेट ने बुधवार को एक बड़े सुधारात्मक निर्णय पर मुहर भी लगा दी है। राज्य सरकार ने छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, मामूली तकनीकी गलतियों पर जेल की जगह जुर्माना भी लगाने और पुराने, अप्रचलित प्रावधान हटाने के लिए ‘उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025’ को मंजूरी भी दे दी है। यह कदम केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप उठाया भी गया है।
52 अधिनियम पहचाने गए, पहले चरण में 7 में संशोधन
नियोजन विभाग ने कुल 52 कानूनों को चिन्हित किया है जिनमें सजा के प्रावधानों में बदलाव भी होना है। पहले चरण में 7 अधिनियमों में संशोधन भी किया गया है। कई कानूनों में कारावास की सजा कम की गई है, जबकि कई में पूरी तरह हटाई भी गई है।
साथ ही जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है और प्रावधान है कि हर 3 साल में 10% की स्वचालित वृद्धि होगी।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, उद्देश्य छोटे अपराधों में जेल की सजा खत्म कर केवल आर्थिक दंड ही लगाना है, ताकि जीवन व कारोबार आसान बन सके।
पहले चरण में बदले गए 7 कानून – क्या बदला?
1. उत्तराखंड नदी घाटी (विकास एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2005
- अधिकृत अधिकारी को रोकने पर अब ₹5,000 जुर्माना।
- झूठी जानकारी देने या नदी घाटी को प्रदूषित करने पर
- पहला अपराध: ₹2,000–₹10,000
- दोबारा अपराध: ₹10,000–₹20,000
2. उत्तराखंड बाढ़ मैदान जोनिंग अधिनियम, 2012
- उल्लंघन पर ₹5,000 जुर्माना।
- अपराध जारी रहने पर प्रतिदिन ₹1,000 अतिरिक्त।
- गंभीर मामलों में ₹20,000 जुर्माना + 2 माह कारावास।
3. प्लास्टिक व अन्य कचरा विनियमन अधिनियम, 2013
- कारावास की सजा तीन महीने से घटाकर एक माह कर दी गई।
4. मलिन बस्तियों सुधार एवं पुनर्वासन अधिनियम, 2016
- सजा छह महीने से घटाकर तीन महीने।
5. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण अधिनियम, 2019
- उल्लंघन पर अब ₹40,000 तक जुर्माना।
- पहले तीन महीने कारावास या ₹20,000 जुर्माना था।
6. जैविक कृषि अधिनियम, 2019
- जुर्माना अब ₹50,000 से बढ़ाकर ₹5 लाख।
- भुगतान में देरी पर रोज ₹1,000 अतिरिक्त।
7. उत्तराखंड फल पौधशाला विनियमन अधिनियम, 2019
- पहली बार उल्लंघन पर कारावास खत्म — जुर्माना बढ़ाकर ₹1–5 लाख।
- बार-बार अपराध पर अब ₹10 लाख जुर्माना, कारावास हटा।
अध्यादेश के मुख्य बिंदु
- छोटे और विनियामक अपराधों में जेल की जगह आर्थिक दंड।
- जुर्माने में हर 3 साल में 10% स्वचालित वृद्धि।
- प्रशासनिक कार्रवाई पर जोर — उत्पाद वापसी, अनुपालन शपथ पत्र आदि।
- गंभीर या बार-बार अपराध होने पर कारावास का प्रावधान बरकरार।
राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद यह अध्यादेश अब पूरे उत्तराखंड में लागू भी हो चुका है। सरकार का दावा है कि यह कदम व्यवसाय व आम नागरिकों की कार्यप्रणाली को आसान भी बनाएगा और विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देगा।