महाशिवरात्रि 2026: वर्षों बाद दुर्लभ शुभ योगों का महासंयोग, चार प्रहरों में शिव पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि पर दुर्लभ शुभ संयोग, विशेष पूजा से मिलेगा मनोकामनाओं का फल

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत खास भी माना जा रहा है, क्योंकि कई वर्षों बाद एक साथ कई शुभ योग भी बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण व चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव व व्यतिपात जैसे शुभ योग भी रहेंगे, जिससे यह पर्व और अधिक फलदायी भी माना जा रहा है।

नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार भगवान शिव की पूजा 3 प्रकार से बताई गई है—सात्विक, राजसिक व तामसिक। श्रद्धालु जिस भाव व विधि से पूजा करते हैं, उसी अनुरूप उन्हें फल भी प्राप्त होता है। गृहस्थ लोग सामान्यतः सात्विक और राजसिक विधि से पूजा भी करते हैं। सात्विक पूजा में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, फूल, मिठाई व फल चढ़ाए जाते हैं, जबकि राजसिक पूजन में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष व कमल पुष्प का विशेष महत्व होता है। अघोर साधना में भस्म आरती व भस्म श्रृंगार से शिव को प्रसन्न भी किया जाता है।

इस वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक भी रहेगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ रही है, इसलिए 15 फरवरी को ही व्रत व पूजा का मुख्य दिन माना जाएगा।

शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात को 4 प्रहरों में बांटकर पूजा का विशेष महत्व भी बताया गया है—

  • प्रथम प्रहर: 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक
  • तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से 6:59 बजे तक

इसके अलावा निशीथ काल पूजा 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक भी की जा सकती है, जिसे अत्यंत शुभ व फलदायी माना गया है।

उपाय व अभिषेक का महत्व

मान्यता है कि इस दिन विशेष उपाय करने से जीवन की परेशानियों से राहत भी मिलती है।

  • 5 बिल्वपत्र पर ‘राम’ लिखकर अर्पित करने से धन संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
  • 3 पत्तों पर केसर और चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर चढ़ाने से मान-सम्मान व पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

अभिषेक का भी अलग-अलग महत्व बताया गया है—

  • दूध से अभिषेक: मन की शांति के लिए
  • गन्ने के रस से: धन प्राप्ति के लिए
  • सरसों के तेल से: शत्रु नाश के लिए
  • गिलोय के रस से: आरोग्य के लिए
  • गंगाजल से: भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार का महाशिवरात्रि पर्व केवल व्रत व पूजा का अवसर ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग भी है।