देहरादून में ल्यूमिनेसेंस डेटिंग कार्यशाला: भूगर्भीय घटनाओं की सही उम्र मापने पर जोर
देहरादून: वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी में ल्यूमिनेसेंस डेटिंग पर एक विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें देशभर के वैज्ञानिकों ने हिस्सा भी लिया। यह तकनीक मिट्टी, चट्टानों व पुरानी वस्तुओं की उम्र मापने में बेहद कारगर भी मानी जा रही है।
हैदराबाद CSIR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र कुमार के अनुसार, ल्यूमिनेसेंस डेटिंग रेडियोकार्बन डेटिंग की तुलना में ज्यादा एक्यूरेट परिणाम देती है और इससे 1.5 लाख वर्ष तक की वस्तुओं की उम्र पता लगाई भी जा सकती है।
वहीं वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि भूकंप, बाढ़, सुनामी व भूगर्भीय घटनाओं के इतिहास को समझने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं के अनुमान के लिए अतीत की घटनाओं को सही तरीके से समझना भी जरूरी है, और इसी दिशा में यह तकनीक उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्यों के लिए बेहद उपयोगी भी साबित होगी।