प्रैक्टिस मैच में नदारद नेता, फाइनल में बन जाते हैं कैप्टन, कार्यकर्ता रह जाते हैं दर्शक

कांग्रेस जिलाध्यक्षों की बैठक में उत्तराखंड से उठे महत्वपूर्ण मुद्दे, नैनीताल ने संगठन की कमजोरी पर जताई चिंता

राज्यों के विधानसभा चुनावों और आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बैठक भी आयोजित की। इस बैठक में उत्तराखंड के जिलाध्यक्षों ने भी अपनी बात रखी, जिसमें नैनीताल जनपद से संगठन के समक्ष पार्टी की कमजोरी और जरूरी सुधारों के सुझाव भी दिए गए।

नैनीताल के जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने बैठक में अपनी बात रखने के लिए 2 मिनट का वक्त लिया, और कांग्रेस की अंदरुनी स्थिति को खुलकर सामने भी रखा। उन्होंने पार्टी की कमजोरियों को उजागर करते हुए कहा कि कांग्रेस को संजीवनी तब मिल सकती है, जब संगठन को मजबूती दी जाएगी और जिला कमेटियों को अधिक पॉवर भी मिलेगा। उनका कहना था कि 1970 में जब पार्टी को जिला कमेटी का सुझाव सबसे महत्वपूर्ण होता था, वही अब बदल भी चुका है, और अब टिकट वितरण में जिलाध्यक्ष की राय लगभग नजरअंदाज ही कर दी जाती है।

राहुल छिमवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं की पीड़ा को क्रिकेट के उदाहरण से समझाया, जहां प्रैक्टिस मैच में न दिखने वाले लोग अचानक से फाइनल में कप्तान ही बन जाते हैं और जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता केवल दर्शक बनकर रह जाते हैं। यह तंज उन्होंने टिकट हासिल करने वालों पर साधा, जो अपने प्रभाव का उपयोग करके पद भी प्राप्त कर लेते हैं।

इसके साथ ही छिमवाल ने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी पदाधिकारी को पद से हटाया जाता है, तो उसे भूतपूर्व बनाने की बजाय उसे नए कार्य सौंपे जाएं ताकि वह लगातार काम करता रहे। साथ ही, यदि कोई जनप्रतिनिधि संगठन के खिलाफ बोलता है, तो उस पर कार्रवाई करने का अधिकार जिला कमेटी को ही मिलना चाहिए।

नैनीताल ने जो तस्वीर पेश की, वह न केवल उनके जिले की स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह अन्य राज्यों में भी लागू होती है। इस बैठक में कई जिलाध्यक्षों ने अपनी बात रखी, और बैठक में इस प्रकार के मुद्दों ने कांग्रेस की अंदरुनी सच्चाई को उजागर भी किया।