हरिद्वार जमीन खरीद घोटाला: तत्कालीन एसडीएम समेत तीन अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश

हरिद्वार जमीन खरीद प्रकरण में विजिलेंस जांच ने बड़ा खुलासा भी किया है। विजिलेंस ने तत्कालीन एसडीएम सहित 3 अधिकारियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाते हुए शासन को उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की है। फिलहाल शासन स्तर पर जांच रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद सख्त कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

54 करोड़ में खरीदी गई थी विवादित जमीन

नगर निगम हरिद्वार ने साल 2024 में ग्राम सराय स्थित कूड़े के ढेर के पास 2.3070 हेक्टेयर अनुपयुक्त भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा भी था। मामला सामने आने पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 2 आईएएस, 1 पीसीएस समेत 12 आरोपियों को निलंबित कर विजिलेंस जांच के आदेश भी दिए थे। 3 जून 2025 को शासन ने जांच का पत्र निदेशक विजिलेंस को भी भेजा था।

जांच में क्या मिला?

विजिलेंस की खुली जांच पूरी हो चुकी है और निदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने रिपोर्ट शासन को भी सौंप दी है। जांच में पाया गया कि तहसील हरिद्वार में भूमि हस्तांतरण से संबंधित परवाने जारी करने व धारा-143 (जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत भू-उपयोग परिवर्तन) की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं भी बरती गईं। विजिलेंस के अनुसार, यह प्रक्रिया सामान्यतः रूटीन भी होती है, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने कर्तव्यों में लापरवाही भी दिखाई।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज

विजिलेंस ने तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका रानी व तत्कालीन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की है। सूत्रों के मुताबिक, शासन तीनों अधिकारियों के खिलाफ कड़ा फैसला भी ले सकता है।

एसडीएम पर पहले से शुरू हो चुकी है कार्रवाई

प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने के आधार पर निलंबित एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई पहले ही शुरू भी की जा चुकी है। उन्हें आरोपपत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने 16 सितंबर को सभी आरोपों से इनकार भी किया है। मामले की विस्तृत जांच शासन ने अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव को भी सौंपी थी।

अब शासन स्तर पर अंतिम निर्णय का ही इंतजार है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के अध्ययन के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कदम भी उठाए जा सकते हैं।