चारधाम यात्रा से पहले LPG संकट पर सरकार सख्त, कमर्शियल गैस के लिए नई SOP जारी

देहरादून में कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी से जूझ रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने कमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी कर दी है।

सचिव आनंद स्वरूप द्वारा जारी एसओपी के अनुसार, प्रदेश में सभी व्यावसायिक गैस कनेक्शन धारकों को रोजाना कुल 2650 सिलिंडर उपलब्ध भी कराए जाएंगे। गैस आपूर्ति की जिम्मेदारी 3 प्रमुख तेल कंपनियों—आईओसीएल, बीपीसीएल व एचपीसीएल—को उनकी बाजार हिस्सेदारी के अनुसार ही दी गई है। ये कंपनियां नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए इसकी जानकारी संबंधित जिलाधिकारियों को भी देंगी।

दरअसल, शीतकालीन यात्रा के बीच व अगले माह से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा को देखते हुए होटल, रेस्टोरेंट व पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने गैस की कमी पर चिंता भी जताई थी। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते आपूर्ति नहीं सुधारी गई, तो पर्यटन उद्योग पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है।

यह एसओपी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही तैयार की गई है। इसके तहत अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए शेष गैस का 20 प्रतिशत व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध भी कराया जाएगा। राज्य स्तरीय समिति और जिलाधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद गैस कंपनियों की सहमति से यह व्यवस्था लागू ही की गई है।

जिलेवार आवंटन भी तय किया गया है, जिसमें देहरादून को 31 प्रतिशत, हरिद्वार व नैनीताल को 13-13 प्रतिशत, ऊधमसिंह नगर को 9 प्रतिशत समेत अन्य जिलों को उनकी जरूरत के अनुसार हिस्सा भी दिया गया है।

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के लिए भी दैनिक कोटा निर्धारित भी किया गया है। फार्मास्यूटिकल कंपनियों को 190, होटल व रिजॉर्ट को 750, रेस्टोरेंट व ढाबों को 1000, सरकारी गेस्ट हाउस को 150, डेयरी व फूड प्रोसेसिंग को 130, औद्योगिक कैंटीन को 150, छात्र आवास (पीजी) को 150 और होमस्टे व स्वयं सहायता समूहों को 130 सिलिंडर प्रतिदिन उपलब्ध भी कराए जाएंगे।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से चारधाम यात्रा के दौरान पर्यटन व अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर गैस की कमी का असर नहीं पड़ेगा।