केदारनाथ यात्रा पर गए 4 श्रद्धालु चौराबाड़ी ग्लेशियर में फंसे, एसडीआरएफ ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, सभी को सुरक्षित बचाया गया

केदारनाथ यात्रा पर उत्तर प्रदेश से आए चार श्रद्धालु चौराबाड़ी ग्लेशियर (गांधी सरोवर) की ओर निकल पड़े थे, लेकिन अचानक मौसम बिगड़ने और बर्फबारी के कारण रास्ता बंद हो गया और वे वहीं फंस गए। इस कठिन परिस्थिति में एसडीआरएफ की टीम ने समय पर रेस्क्यू कर सभी यात्रियों की जान बचा ली। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हिमालयी क्षेत्र में बिना अनुमति और तैयारी के यात्रा करना कितना जानलेवा साबित हो सकता है।

जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु:

  • हर्ष राणा पुत्र राजकुमार राणा

  • दीपक नेगी पुत्र योगेश्वर नेगी

  • नवनीत त्यागी पुत्र अरविंद त्यागी

  • आदित्य पुत्र सर्वन कुमार

सभी निवासी राधेश्याम विहार, मुरादनगर, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। ये लोग केदारनाथ दर्शन के बाद बिना किसी अनुमति या गाइड के चौराबाड़ी ताल (ग्लेशियर) की ओर बढ़ गए, जो मंदिर से लगभग 2–3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस दौरान मौसम ने करवट ली और तेज बर्फबारी शुरू हो गई। चारों श्रद्धालु मौसम और दुर्गम मार्ग के चलते फंस गए।

किसी तरह चारों श्रद्धालुओं ने पुलिस को मोबाइल नेटवर्क के बीच थोड़ी देर की उपलब्धता में सूचना पहुंचाई। इसके तुरंत बाद एसडीआरएफ पोस्ट केदारनाथ से उपनिरीक्षक मनोहर कन्याल के नेतृत्व में एक टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके के लिए रवाना की गई।

एसडीआरएफ की टीम ने मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के बीच भी टीम पीछे नहीं हटी।

  • टीम ने चौराबाड़ी ग्लेशियर क्षेत्र में पैदल ट्रैकिंग कर श्रद्धालुओं को सकुशल खोजा।

  • रेस्क्यू के बाद सभी को सुरक्षित नीचे लाया गया और उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें सूचना दी गई कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं।

चौराबाड़ी ग्लेशियर, जिसे गांधी सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकप्रिय ट्रैकिंग स्थल है। यह समुद्र तल से लगभग 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और केदारनाथ मंदिर के पीछे की ओर है।

हालांकि यह स्थल बेहद सुंदर है, लेकिन यहां का वातावरण:

  • तेजी से बदलता है

  • ऑक्सीजन का स्तर कम होता है

  • रास्ते फिसलन भरे और दुर्गम होते हैं

  • मोबाइल नेटवर्क बेहद सीमित होता है

इसलिए प्रशासन की अनुमति और गाइड के बिना यहां जाना जोखिम भरा हो सकता है।

स्थानीय पुलिस और प्रशासन लगातार पर्यटकों से अपील कर रहे हैं कि:

  • बिना परमिशन किसी भी हाई-एल्टीट्यूड लोकेशन पर न जाएं

  • स्थानीय गाइड की मदद लें

  • मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें

  • बर्फबारी और बारिश के मौसम में ट्रेकिंग से बचें

  • नेटवर्क की समस्या को ध्यान में रखें, क्योंकि आपातकाल में संपर्क करना मुश्किल होता है

चारों यात्रियों की सुरक्षित वापसी के बाद स्थानीय प्रशासन और परिजनों ने एसडीआरएफ टीम की कार्यकुशलता और तत्परता की सराहना की।
उपनिरीक्षक मनोहर कन्याल के नेतृत्व में की गई इस मुहिम ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के समय एसडीआरएफ की भूमिका अमूल्य होती है।

चारों श्रद्धालु अब सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना उत्तराखंड आने वाले सभी तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक चेतावनी है। हिमालय जितना सुंदर है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है यदि उसे बिना समझे और बिना तैयारी के पार करने की कोशिश की जाए।